भेड़ और बकरी

भेड़ और बकरियों और उनके बच्चों का विभिन्न उद्देश्यों के लिए शोषण किया जाता है । उन्हें मार दिया जाता है ताकि उन्हें (विशेषकर मेमने) खाया जा सके। उनका ऊन और दूध, और उनकी त्वचा का उपयोग चमड़े का उत्पादन करने के लिए भी किया जाता है। क्योंकि एक लाभ उन्हें बेचने से बनाया जा सकता है, इन उत्पादों की खपत अधिक होती है और अधिक भेड़ और बकरियों को पाला जाता हैं , जिससे वे पीड़ित होते हैं और फिर उन्हें मार दिया जाता हैं ।

ऊन के लिए जानवरों को पालना उन मुख्य तरीकों में से एक है जिसमें इस उद्देश्य के लिए जानवरों का उपयोग किया जाता है। ऊन पर दिए गए पृष्ठ में, जो इस लेख को पूरा करता है (पूरक की तरह), कई तरीके जिनमें इन जानवरों को हानि होती है, समझाए गए हैं। यह लेख और भी ख़ासतौर से बकरियों, भेड़ों, बच्चों (भेड़ – बकरियों के बच्चे), और मेमनों के शोषण के अन्य लक्षणों (विशिष्टताओं) को समझायेगा, जो कि उनके ऊन के लिए उपयोग किए जाने से ख़ासतौर से संबंधित नहीं हैं ,बल्कि अन्य उद्देश्यों जैसे मांस और चमड़ा उत्पादन से हैं।

भेड़-बकरियों को कैसे पाला जाता है

इन जानवरों को पालने के तरीकों को तीन अलग-अलग प्रकारों में बांटा जा सकता है।

  • व्यापक: जानवर चरवाहा के नियंत्रण में चरने में दिन बिताते हैं, और फिर रात बिताने के लिए बाड़े पर लौट आते हैं। आमतौर पर बाड़े इस तरह डिजाइन किए गए होते हैं की, ट्रैक्टरों से मलत्याग को आसानी से हटाया जा सके । नतीजतन, बाड़े ठंडे हो सकते हैं , और आर्थिक उद्देश्य से वे सहज नहीं होना चाहिए क्योंकि जानवर असुविधा में भी जीवित रह सकते हैं।
  • अर्धव्यापक: जानवर मौसम के दौरान दिन के दौरान चरने के लिए बाहर जाते हैं जब मौसम और वातावरण अच्छा हो और बाहर उनके लिए पर्याप्त भोजन है। वे बाकी समय अपने बाड़े में बिताते हैं और उन्हें चारा खिलाया जाता है।
  • गहन: जानवर अपने पूरे जीवन को बाड़े में बिताते हैं और वहाँ उन्हें चारा खिलाया जाता है ।

इव्स हर साल एक या दो बार मेमने को जन्म दे सकती है, क्योंकि उनकी गर्भावधि केवल (भेड़ और बकरियों दोनों के मामला) पाँच महीने की होती हैं । मादा भेड़ प्रजनन शुरू कर सकती हैं जब वे एक वर्ष की होती हैं, और बकरियों में जब वे केवल नौ महीने की होती हैं। कई मेमनों को अपनी माताओं के साथ रहने की अनुमति नहीं है; इसके बजाय, उन्हें मरने और खाए जाने के लिए भेज दिया जाता हैं । यह आम तौर पर जन्म के तुरंत बाद होता है, यह मादा और मेमने दोनों पर काफ़ी मात्रा का आघात पहुँचाता हैं ।

लगभग तीन महीने की उम्र में, भेड़ के बच्चे जो जीवित रहते हैं क्योंकि उनका उपयोग किया जाना है ऊन के उत्पादन के लिए, बहुत दर्दनाक विकृति होता है। वे अपने कानों पर अंकित होते हैं और पूंछ काट दी जाती हैं । परजीवी होने से रोकने के लिए उनकी पूंछ काटी जाती है।

इसके अलावा, ठंड के मौसम में बड़ी संख्या में मेमने मर जाते हैं । वयस्क बकरियां और भेड़ें ठंड (विशेष रूप से भेड़) के प्रति प्रतिरोधी हैं, लेकिन युवा बच्चे और भेड़ के बच्चे नहीं हैं, और यह मृत्यु दर के मुख्य कारणों में से एक है । यह विशेष रूप से उन्हें मिलने वाला भोजन अच्छी गुणवत्ता का नहीं होता है या दुर्लभ होने के कारण होता हैं ।

भोजन की कमी से मृत्यु अधिक आसानी से हो सकती है क्योंकि ये जानवर बड़े झुंड में रहते हैं और व्यक्तिगत ध्यान नहीं पाते हैं। असल में, यह ऑस्ट्रेलिया में मेमने की मृत्यु का मुख्य कारण है (जो लगभग दुनिया में सभी ऊन का चौथाई हिस्से का उत्पादन करता है )।

हम में से कई लोग चरवाहों की आदर्श छवियों के साथ बड़े हुए हैं जो प्यार से जानवरों की देखभाल करते हैं । वास्तविकता में, चरवाहे जानवरों को संसाधनों के रूप में उपयोग कर रहे हैं, और उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए उनका कुशलतापूर्वक उनके शरीर का दोहन किया जा सकता है । चरवाहे कुछ हद तक जानवरों की परवाह करते हैं, लेकिन वे पशु शोषण व्यवसाय में हैं, इसलिए जानवरों की भलाई उनके आर्थिक हितों के लिए द्वितीयक ।

उनकी मौत

कसाईखाना की यात्रा पर जाने वाले बकरियों, भेड़ों, उनके बच्चों और मेमनों को पानी या भोजन नहीं दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ड्राइवर का काम आसान हो, और उसे जानवरों का मलमूत्र साफ ना करना पड़े । हालांकि, यह स्पष्ट रूप से जानवरों की पीड़ा का बहुत बड़ा कारण बनता है ।

अंत में, उन्हें उनकी मृत्यु के लिए भेजा जाता है। कसाईखाना एक तनावपूर्ण और अक्सर उनके लिए भयानक अनुभव होता हैं क्योंकि वे उनकी मौत का इंतजार कर रहे होते हैं।1 फिर उनको दर्दनाक पीड़ा देते हुए मार दिए जाते हैं जो उन्हें उनके जीवन से वंचित करता है।

भेड़ दूसरे जानवरों की तरह पीड़ित होते हैं लेकिन भेड़ें अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करती हैं (उदाहरण के लिए, सूअर)। यह विशेष रूप से बूचड़खाने जैसी जगहों में दिखाई देता है । यह विकासवादी कारणों के कारण है। जो शिकारी अपने शिकार का चयन करते हैं उनके द्वारा भेड़ पर हमला किया जाता है । शिकारी उन जानवरों पर हमला करते हैं जो कमजोर या बीमार दिखते हैं। परिणामस्वरूप, पीढ़ियों से भेड़ों का चयन किया गया है शिकारियों द्वारा । जो प्राणी अपनी पीड़ा नहीं दिखाते हैं , उनके बचने की संभावना अधिक है । लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पीड़ित नहीं हैं। वे उतना ही पीड़ित होते हैं, जितना कि दूसरे जानवर। अंतर केवल इतना है कि हमने अभी तक उनकी भावनाओं को पूरी तरह से पहचानना नहीं सीखा है।2

इस सब से हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि संसाधनों के रूप में भेड़ और बकरियों का उपयोग होता है न केवल ऊन पर अनुभाग में वर्णित कारणों के लिए, बल्कि उत्पादन, और जब वे अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाते है ,उनके लिए बहुत हानिकारक है।


आगे की पढाई

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नोट्स

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2 Veissier, I.; Boissy, A.; Désiré, L. & Greiveldinger, L. (2009) “Animals’ emotions: Studies in sheep using appraisal theories”, Animal Welfare, 18, pp. 347-354.