जंगली जानवरों की पीड़ा पर वीडियो पाठ्यक्रम – पाट 9

जंगली जानवरों की पीड़ा पर वीडियो पाठ्यक्रम – पाट 9

 



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बीमार, चोटिल या अनाथ जानवरों को उपचार उपलब्ध कराना, आवास बनाना और भूखे और प्यासे जानवरों की मदद करना

जैसा कि हम पिछले अद्याय में पड़ चुके हैं, जानवरों को बचाना जंगल में जानवरों की मदद कर सकने का एकमात्र रास्ता है| इस अद्याय में, हम और तरीके देखेंगे जिनमें वे बीमार या घायल होने पर चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करते हैं| फिर हम अनाथ जानवरों की देखभाल के कुछ उदाहरण पड़ेंगे| अंत में, हम भूखे और प्यासे जानवरों की मदद किये जाने को पड़ेंगे|

बीमार जानवरों का उपचार

मेंज का उपचार

सार्कोप्टिक खुजली परजैविक घुनों के घर बनाने द्वारा होने वाला एक त्वचा रोग है| यह कुत्तों, बिल्लियों, कोयोट, भालू, और वोमबैट सहित कई अमानुष स्तनधारियों को प्रभावित करता है| वोमबैट ख़ासतौर से खुजली द्वारा प्रभावित होते हैं| यह माना जाता है कि यह यह वोमबैट के अन्दर सार्कोप्टिक घुनों के संचरण और जीवित रहने के लिए बनाये गए बिलों की स्थिति के कारण होता है| संक्रमित वोमबैट के बाल झड़ते हैं, उनकी त्वचा खुरदुरी और संक्रमित हो जाती है, और उनकी आँखे और कान खुरदरे हो जाते हैं| गंभीर मामलों में, इससे मौत हो सकती है| संक्रमित वोमबैट आमतौर पर सिडेक्टिन नामक दवाई से ठीक होता है|1 किन्तु पकड़े जाने का तनाव वोमबैट को मार सकता है| ख़ासतौर से तब जब वे कमज़ोर अवस्था में होते हैं| अतः उपचार आमतौर पर ख़ासतौर से बनाए गए एक फ्लैप के इस्तेमाल से होता है जिसे वोमबैट के ज़ख्म के प्रवेश पर लगाया जाता है|

चमगादड़, उभयचर, सरीसृप, कीटों और मछलियों का प्रोबायोटिक उपचार

सफ़ेद नाक सिंड्रोम एक संक्रामक बीमारी है जो चमगादड़ों को प्रभावित करती है। वर्ष 2007 से, उत्तरी अमेरिका में इसने छह मिलियन से अधिक चमगादड़ों को मार डाला है। कुछ प्रजातियों में मृत्यु दर 90% से अधिक है। यह बीमारी चमगादड़ों की हाइबरनेशन (सीतनिद्रा) को प्रभावित करती है, जिससे वे या तो अपनी संचित वसा का उपयोग कर भूख से मर जाते हैं, या ठंड के मौसम में भोजन खोजने की कोशिश में बाहर आकर मर जाते हैं। वर्ष 2019 में, प्रोबायोटिक बैक्टीरिया द्वारा चमगादड़ों का इलाज किया गया, जिससे उनके जीवित रहने की दर 8% से बढ़कर 46% हो गई। हालांकि, इलाज के लिए प्रेरणा संरक्षणवादी रुचियों और बड़े पैमाने पर किए जाने वाले कार्यों से आती है, जो तब भी महत्वपूर्ण रूप से चमगादड़ों में असमय मृत्यु और पीड़ा को कम करते हैं।2

प्रोबायोटिक उपचार अन्य प्रजातियों में इस तरह की बीमारियों के इलाज के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। एक अन्य फंगल संक्रमण से प्रभावित उभयचर पर घातक प्रभाव पड़े, जिसने 500 से अधिक प्रजातियों के लाखों जानवरों को मार डाला। संक्रमित जानवरों में भूख में कमी, सुस्ती, और त्वचा का मोटा होना जैसी लक्षण दिखाई देते हैं, जो उन्हें मौत की ओर ले जाते हैं, क्योंकि इससे प्रभावित जानवर अपनी त्वचा के माध्यम से पोषक तत्व नहीं ले पाते और विषैले पदार्थ (टॉक्सिन) नहीं निकाल पाते। कुछ उभयचर अपनी त्वचा के माध्यम से सांस लेते हैं, और एक बार संक्रमित होने पर वे सांस लेने में असमर्थ हो सकते हैं। वर्ष 2016 में, बोरियल टॉड का उपचार प्रोबायोटिक से किया गया, जिससे उनके जीवित रहने की दर 40% बढ़ गई। प्रोबायोटिक का उपयोग भविष्य में इस बीमारी के प्रति संवेदनशील उभयचरों का इलाज करने या उन्हें बचाने के लिए किया जा सकता है।3

साँपों और अन्य मधुमक्खियों में फंगल बीमारियों के प्रोबायोटिक उपचार की संभावना पर अनुसंधान भी जारी है। प्रोबायोटिक का उपयोग मछलियों की विभिन्न प्रजातियों में संक्रमण रोकने के लिए भी किया जा चुका है।4 प्रोबायोटिक में बीमारियों से जानवरों को बचाने या उनके प्रभावों को कम करके जंगल में रहने वाले कई जानवरों के स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की क्षमता है।

चोटिल जानवरों का उपचार

जंगल में रहने वाले जानवर त्वरित रूप से द्वंद्व या दुर्घटनाओं में घायल हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, वे अन्य जानवरों से लड़ाई के दौरान चोटिल हो सकते हैं। वे शिकारियों से बचने, अपनी सत्ता बनाए रखने, संसाधनों के संरक्षण, प्रजनन के लिए साथी पर लड़ाई, या समूह में उच्च सामाजिक पद हासिल करने के दौरान चोटिल हो सकते हैं। कुछ प्रजातियों में, अक्सर मादाएं नरों द्वारा बलपूर्वक संभोग करने से घायल हो जाती हैं। और जैसे मनुष्यों के साथ होता है, जंगली जानवर भी दुर्घटनाओं में घायल हो सकते हैं, चाहे वे जंगल में अपना सामान्य जीवन जी रहे हों या मानवीय संरचनाओं, जैसे सड़क या खिड़कियों, के कारण। किन्तु अक्सर उनकी चोटों का इलाज करना संभव होता है।

जंगल में जानवर कभी-कभी क्षेत्रीय होते हैं। वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा पारंपरिक व्यवहारों से करते हैं, जैसे डर दिखाना, चिल्लाना और शारीरिक भाषा का प्रयोग। हालांकि, कभी-कभी उन्हें अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए मजबूर होना पड़ता है, और इससे गंभीर चोट लग सकती है। पीठ का टूटना जंगल में जानवरों को होने वाली सामान्य और घातक चोटों में से एक है। बिना किसी हस्तक्षेप के, यह अक्सर मृत्यु का कारण बनता है, क्योंकि घायल जानवर भोजन खोजने और शिकारी से बचने में कम सक्षम होते हैं। पीठ (कमर) दुर्घटना में या अन्य जानवरों से द्वंद्व के दौरान टूट सकती है। यदि इलाज संभव हो, तो जानवर पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

पक्षियों और अन्य उड़ने वाले जानवरों के लिए पंख का टूटना आमतौर पर घातक होता है। हालांकि, अधिकांश मामलों में उनका इलाज अपेक्षाकृत आसान है – पक्षी और चमगादड़ जो पशु पुनरुत्थान केंद्रों में लाए जाते हैं, वे आमतौर पर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। यहाँ तक कि घर पर कीड़ों के टूटे पंख भी जोड़े जा सकते हैं, जैसे तितलियाँ जो बार-बार पंख खो देती हैं।

अनाथ जानवरों की देखभाल

जंगल में माता-पिता की देखभाल प्राप्त करने वाले जानवर कभी-कभी एक या दोनों अभिभावकों को खो देते हैं| इन परिस्थितियों में, उनका बचना आसान नहीं होता है| ज़्यादातर अनाथ जानवर भूख से मरते हैं, प्यास से मरते हैं, या शिकारियों द्वारा खा लिए जाते हैं| कम संख्या में बचने वाले जानवर अक्सर कठिन मेहनत से गुज़रते हैं|

विकासवादी कारणों से, ज़्यादातर जानवर अस्तित्व में आने के तुरंत बाद ही मर जाते हैं| बहुत छोटे जानवरों के लिए जीवित बचना मुश्किल है| अधिकतर नए जन्मे जानवरों को माता-पिता की देखभाल नहीं मिलती, जो उनके मरने के ख़तरे को बढ़ाता है| किन्तु वे जो माता-पिता की देखभाल प्राप्त करते हैं फिर इस पर निर्भर हो जाते हैं, इसे खोते हैं जिसका अर्थ है लगभग अचानक मौत|

इसके अलावा, कई अमानुष जानवर अपने परिवार के साथ मज़बूत मानसिक सम्बन्ध में हैं, और उनके मरने पर वे अपने माता-पिता को याद करते हैं और शोक का अनुभव करते हैं| अनाथ हो चुके सामाजिक जानवर भी अकेलेपन से पीड़ित हो सकते हैं क्योंकि वे सामाजिक क्रियाकलाप से वंचित होते हैं जो कि उनकी भलाई के लिए बहुत ज़रूरी है| संयोग से, मनुष्य अनाथ जानवरों को बचाकर या उन्हें ज़रूरी देखभाल उपलब्ध करा कर उनका साथ दे सकते हैं, हालाँकि यह कभी-कभी होता है|

वर्तमान में मौजूद वन्य जीव अनाथालयों में गैंडा अनाथालय शामिल है जो वर्ष 2001 में दक्षिण अफ्रीका में स्थापित हुआ था|5 हाथी भी अनाथ हो सकते हैं, उदाहरण के लिए सूखे से, शिकार होकर, या कीचड़ में फंसने के कारण| शेल्ड्रिक वन्य जीव ट्रस्ट अनाथ हाथियों और गैंडों की देखभाल के लिए कार्य करता है, और अभी तक उनहोंने सफलतापूर्वक 244 अनाथ हाथियों और गैंडों को पाला है| डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो में सेंकवेक्वे केंद्र अनाथ हो चुके पहाड़ी गोरिल्ला और पूर्वी निम्न ज़मीनी गोरिल्लाओं की देखभाल और संरक्षण के लिए बना एक अभ्यारण्य है| गोरिल्ला के बच्चे अत्यंत रूप से अपनी माताओं पर निर्भर होते हैं, और यदि उनकी माँ मर जाए तो उनका अपने बूते पर जीवित रहना काफ़ी कठिन होता है|

यहाँ अन्य जानवर हैं जिन्हें माता-पिता की देखभाल नहीं मिलती| वे सामान्यतः बड़ी संख्या में पैदा होते हैं और अस्तित्व में आने के तुरंत बाद मर जाते हैं| समुद्री कच्छप एक उदाहरण है| वयस्क अवस्था तक जाने वालों की संख्या बहुत कम होती है| कुछ मामलों में, हालाँकि उनकी मदद करना संभव है| लोगों ने शिशु कच्छपों की मदद करने के लिए प्रयास किये हैं| अंडे देते कच्छपों की मदद करने के एक तरीका उन्हें नमक के ढेर या समुद्र की ओर ले जाना है, जो उनके आवास के आसपास के क्षेत्र की बजाय सुरक्षित है| ये मानक संरक्षणवाद को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं, किन्तु वे इसमें जानवरों की मदद करते हैं|6

यहाँ अन्य जानवर हैं जिन्हें माता-पिता की देखभाल नहीं मिलती| वे सामान्यतः बड़ी संख्या में पैदा होते हैं और अस्तित्व में आने के तुरंत बाद मर जाते हैं| समुद्री कच्छप एक उदाहरण है| वयस्क अवस्था तक जाने वालों की संख्या बहुत कम होती है| कुछ मामलों में, हालाँकि उनकी मदद करना संभव है| लोगों ने शिशु कच्छपों की मदद करने के लिए प्रयास किये हैं| अंडे देते कच्छपों की मदद करने के एक तरीका उन्हें नमक के ढेर या समुद्र की ओर ले जाना है, जो उनके आवास के आसपास के क्षेत्र की बजाय सुरक्षित है| ये मानक संरक्षणवाद को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं, किन्तु वे इसमें जानवरों की मदद करते हैं|7

जानवरों के लिए आवास बनाना

दूसरे रूप में जंगली जानवरों की मदद उनके इस्तेमाल के लिए आवास या अन्य संरचनाएं बनाना है| ये संरचनाएं जानवरों को खतरनाक मौसमी परिस्थितियों या शिकारियों से बचने में मदद करती हैं| विभिन्न प्रकार के कई जानवर इन्हीं कारणों से घोंसले बनाते हैं|8 हालाँकि, यह लम्बा समय ले सकता है और अक्सर यह उतना बेहतर नहीं होगा जितना जो संरचना हम उनके लिए बना सकते हैं| हम पूर्व-निर्मित आवास या घोंसले उपलब्ध करा कर जानवरों की मदद कर सकते हैं|9

उन्हें हवा, पानी, और अन्य मौसमी परिस्थितियों से बचाने के साथ-साथ, ये संरचनाएं उनमें रहने वाले जानवरों को तापमान नियमित रखने में मदद कर सकती हैं| जानवर जो ताप अपने शरीर से छोड़ते हैं वह पूरी तरह उन्हें वापस दिया जाता है क्योंकि यह संरचना को गर्म रखने में मदद करता है, बजाय कि खो देना जो ज़ाहिर है होता|  इन्हीं कारणों से, इस तरह के आवासों तक पहुँच होना एक जानवर के लिए आसानी से जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर हो सकता है|

संरचनाएं जानवरों के लिए शिकारियों से बचने के लिए भी सुलभ हो सकते हैं क्योंकि वे छुपी जगहों की तरह काम कर सकते हैं जिसे अन्य जानवर शायद ना देखें या उस तक ना पहुंचें|

मनुष्यों द्वारा बनाया जाने वाला सबसे सामान्य आवास “बर्ड बॉक्स” है| ये आमतौर पर तब इस्तेमाल किये जाते हैं जब पक्षी परिवार शुरू करते हैं| हालाँकि, एक पक्षी द्वारा परिवार बना लेने के बाद यदि बर्ड बॉक्स को साफ़ ना किया जाए, तो पक्षियों के नए परिवार में बीमारियाँ और परजीवी फ़ैल सकते हैं|10

कई अन्य जानवरों के लिए भी संरचनाएं बने जा सकती हैं| उदाहरण के लिए, चमगादड़ों को गर्म जगह की ज़रुरत होती है जब वे बसेरा करते हैं, जहाँ वे आराम से सो सकें, बच्चों को पाल सकें या सीतनिद्रा में हों| वे मनुष्यों के आवास में बसेरा करेंगे यदि उनके पास बेहतर अवसर हों| घरों में रहने वाले चमगादड़ प्राकृतिक जगहों पर बसेरा करने वालों की बजाय कुछ अलग स्तर पर बेहतर तरीके से रहते हुए पाए गए हैं|11 हम चमगादड़ों के इस्तेमाल के लिए और घर बना सकते हैं या विद्यमान घरों के और इस्तेमाल को आसान कर सकते हैं|

यह भी पाया गया है कि खरगोशों को लाभ हो सकता है जब उनके लिए अच्छी तरह से बनाया और संयोजित किया हुआ बाड़ा व्यवस्थित करें| इस तरीके से अकशेरुकियों की भी मदद हो सकती है| मोथ की एक प्रजाति पत्तियों के गोलों का इस्तेमाल करती पाई गई है जिसे वैज्ञानिकों ने बनाया था| इस क्षेत्र में रहने वाले संधिपादों की अन्य प्रजातियाँ भी इन संरचनाओं का इस्तेमाल करती पाई गई थीं|12

भूखे और प्यासे जानवरों की मदद करना

साफ़ पानी की कमी पीड़ा का एक और स्रोत है और जानवरों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर ख़तरा| जंगली जानवरों की भी मदद की जा सकती है जब उन्हें पानी की ज़रुरत होती है, और अक्सर यह करना आसान है| छोटे पात्रों में पानी रखा जा सकता है जो उनकी पहुँच में हो| यहाँ छोटे जानवरों के लिए ख़तरा है जो गिर के डूब सकते हैं, हालाँकि छोटी सीढ़ियाँ या अन्य उपाय उन्हें बाहर निकलने के लिए ज़रूरी हैं| जल के पात्रों को भी नियमित रूप से साफ़ करते रहना आवश्यक है जिससे वे कुछ जानवरों से दूसरों में बीमारियों का संचरण ना करें|

बहुत बड़े तालाब बनाना परेशानी का कारण हो सकता है, जिसमें कुछ जानवर पैदा हो सकते हैं जैसे मच्छर या बहुत बड़ी संख्या में पुनरुत्पादन करते हुए अन्य कीड़े, जो स्रोतों की कमी के कारण तुरंत दर्दनाक रूप से मर जाते हैं| कीड़े भी बीमारियों और परजीवियों का संचरण कर सकते हैं|

जानवरों की मदद का अन्य तरीका उनमें से कुछ को भूख से बचाना है जब वे भोजन में कमी की भीषण स्थिति का सामना करते हैं| वास्तव में, जंगल में जानवरों को भोजन करने में बाधा सामान्य है| गंभीर सूखे और कठोर सर्दियों जैसी परिस्थितियां कई जानवरों के लिए भूख से मौत का कारण हो सकती हैं| इस वजह से, कभी-कभी जानवरों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है जो उनके जीवित रहने के लिए ज़रूरी है| कभी-कभी यह जानवरों की थोड़ी सी जनसँख्या का संरक्षण करने के लिए किया जाता है जो ख़ासतौर से मनुष्यों को पसंद आते हैं|13 अन्य मामलों में, बचाये गए जानवर वे हैं जिनका पर्यटन में कुछ लाभ हो, जैसे यदि पर्यटक जब कोई जानवर देखना चाहता हो तो वह उस जगह का ख़ास हो| इन्हीं कारणों से, सहायक भोज्य मानकों ने विभिन्न देशों के कई राष्ट्रीय उद्यानों में अपनी जगह बनाई है| यदि ये हस्तक्षेप भी जानवरों की मदद के लक्ष्य से नहीं किये जाते, तो भी वे उनके लिए सकारात्मक रूप में समाप्त होते हैं|

हालाँकि, इन मामलों में यह महत्वपूर्ण है कि जानवरों को अत्यधिक भोजन ना दिए जाने के प्रति सतर्क रहें वर्ना वे उस जनसँख्या से परे पुनरुत्पादन करेंगे जो उनकी हुआ करती थी| नहीं तो, उनमें से अधिकतर मर जायेंगे क्योंकि यहाँ सभी के जीवित रहने के लिए संसाधन नहीं होंगे| इसी कारण से कई मामलों में जंगल में जानवरों को ज़रुरत से अधिक भोजन देना ठीक विचार नहीं है, क्योंकि यह भविष्य में और अधिक पीड़ा का कारण होगा, उन्हें कम करने के प्रयास के परिणाम के रूप में|14


 

टिप्पणियाँ

1 तस्मानिया. प्राथमिक उद्योग, पार्क, जल और पर्यावरण विभाग (2017) “वॉम्बैट मैन्ज सामान्य प्रश्न”, वन्यजीव प्रबंधन [9 सितम्बर 2019 को अभिगम किया गया]।

2 हॉपकिन्स, एम. सी. और सोइलो, एस. सी. (2018) चमगादड़ों में व्हाइट-नोज़ सिंड्रोम के लिए अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की प्रतिक्रिया: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण तथ्य पत्रक 2018–3020, रेस्टन: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण; हॉयट, जे. आर.; लैंगविग, के. ई.; व्हाइट, जे. पी.; कारक्का, एच. एम.; रेडेल, जे. ए.; पारीसे, के. एल.; फ्रिक, डब्ल्यू. एफ.; फोस्टर, जे. टी. और किलपैट्रिक, ए. एम. (2019) “व्हाइट-नोज़ सिंड्रोम से चमगादड़ों की रक्षा के लिए प्रोबायोटिक बैक्टीरिया का क्षेत्रीय परीक्षण”, साइंटिफिक रिपोर्ट्स, 9 [9 सितम्बर 2019 को अभिगम किया गया]।

3 शीले, बी. सी.; पासमैन्स, एफ.; स्केराट, एल. एफ.; बर्जर, एल.; मार्टेल, ए.; ब्यूकेमा, डब्ल्यू.; एसेवेडो, ए. ए.; बुरोवेस, पी. ए.; कार्वाल्हो, टी.; कैटेनेज़ी, ए.; डे ला रीवा, आई.; फिशर, एम. सी.; फलेचास, एस. वी.; फोस्टर, सी. एन.; फ्रियास-आल्वारेज़, पी.; गार्नर, टी. डब्ल्यू. जे.; ग्रैटविके, बी.; ग्वायासामिन, जे. एम.; हिर्शफेल्ड, एम.; कोल्बी, जे. ई.; कोस्च, टी. ए.; ला मारका, ई.; लिंडेनमेयर, डी. बी.; लिप्स, के. आर.; लोंगो, ए. वी.; मानेयरो, आर.; मैकडोनाल्ड, सी. ए.; मेंडेलसन, जे., III; पालासियोस-रोड्रिग्ज, पी.; पारा-ओलेआ, जी.; रिचर्ड्स-जावाकी, सी. एल.; रो़डल, एम.-ओ.; रोवितो, एस. एम.; सोटो-अज़ात, सी.; टोलेडो, एल. एफ.; वॉयलेस, जे.; वेल्डन, सी.; व्हिटफील्ड, एस. एम.; विल्किंसन, एम.; ज़ामुडियो, के. आर. और कैनेसा, एस. (2019) “उभयचर फंगल पैनज़ूटिक जैव विविधता के विनाशकारी और सतत ह्रास का कारण”, साइंस, 363, पृ. 1459-1463 [9 सितम्बर 2019 को अभिगम किया गया]।

4 हिल, ए. जे.; लेयस, जे. ई.; ब्रायन, डी.; एर्डमैन, एफ. एम.; मेलोन, के. एस. और रसेल, जी. एन. (2018) “साँपों से पृथक सामान्य त्वचीय जीवाणु Ophidiomyces ophiodiicola की वृद्धि को रोकते हैं”, इकोहेल्थ, 15, पृ. 109-120; एल खूरी, एस.; रूसो, ए.; लेक्युर, ए.; चेआइब, बी.; बुसलामा, एस.; मर्सियर, पी.; डेमे, वी.; कास्टेक्स, एम.; जियोवेनाज़्ज़ो, पी. और डेरोम, एन. (2018) “शहद मधुमक्खी (Apis mellifera) और इसके सूक्ष्मबीजाणु अंतःकोशिकीय परजीवी Nosema ceranae के बीच हानिकारक अंतःक्रिया को आंतरिक या बाह्य आंत माइक्रोबायोटा स्ट्रेन्स देने से कम किया गया”, फ्रंटियर्स इन इकॉलॉजी एंड एवोल्यूशन, 6 [12 अक्तूबर 2019 को अभिगम किया गया]।

5 केयर फॉर वाइल्ड राइनो सैंक्चुअरी (2016) “काले और सफेद गैंडों को अलग कैसे पहचानें”, केयर फॉर वाइल्ड राइनो सैंक्चुअरी [25 अगस्त 2019 को अभिगम किया गया]।

6 स्टीवर्ट, के. जे. (1988) “जंगली गोरिल्ला (Gorilla gorilla) में दुग्धपान और स्तन्यकालीन एनोएस्ट्रस”, रिप्रोडक्शन, 83, पृ. 627-634।

7 संभावित अपवाद के लिए देखें: फेरारा, सी. आर.; वोग्ट, आर. सी.; सूसा-लीमा, आर. एस.; टार्डियो, बी. एम. आर. और बर्नार्डेस, वी. सी. डी. (2014) “अमेज़न नदी कछुए (Podocnemis expansa) में ध्वनि संचार और सामाजिक व्यवहार”, हर्पेटोलॉजिका, 70, पृ. 149-156; सी टर्टल कंज़र्वेंसी (2019) “समुद्री कछुओं के बारे में जानकारी: सामान्य व्यवहार”, कंज़र्व टर्टल्स [4 सितम्बर 2019 को अभिगम किया गया]।

8 हैंसेल, एम. (2005) एनिमल आर्किटेक्चर, न्यूयॉर्क: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।

9 बोवेन्कर्क, बी.; स्टाफल्यू, एफ.; ट्रैम्पर, आर.; वोरस्टनबोश, जे. और ब्रॉम, एफ. डब्ल्यू. ए. (2003) “कार्य करना या न करना? जंगली से जानवरों को आश्रय देना: पशु और पर्यावरणीय नैतिकता के बीच संघर्ष का एक बहुलतावादी लेखा-जोखा”, एथिक्स, प्लेस एंड एन्वायरनमेंट, 6, पृ. 13-26।

10 मोलर, ए. पी. (1989) “परजीवी, शिकारी और घोंसला बक्से: पक्षियों के घोंसला बक्से अध्ययनों में तथ्य और कृत्रिमता?”, ओइकोस, 56, पृ. 421-423; एरिंगटन, डी. (2011) “पक्षियों को पक्षीघर में क्या चाहिए”, द सिएटल टाइम्स, 4 अप्रैल [10 नवम्बर 2019 को अभिगम किया गया]।

11 लाउसन, सी. एल. और बार्कले, आर. एम. (2006) “इमारत में रहने के लाभ: बड़े भूरे चमगादड़ (Eptesicus fuscus) चट्टानों बनाम इमारतों में”, जर्नल ऑफ मैमेलॉजी, 87, पृ. 362-370।

12 हैंसेल, एम. (2005) एनिमल आर्किटेक्चर, उपरोक्त, पृ. 216-217; फर्नांडीज़-ओलाला, एम.; मार्टिनेज-जॉरेगुई, एम.; गिल, एफ. और सैन मिगुएल-आयांज़, ए. (2010) “देशी जंगली खरगोश आबादी को बढ़ाने के साधन के रूप में कृत्रिम बिल उपलब्ध कराना: किस प्रकार की बिल और उन्हें कहाँ स्थापित करना चाहिए?”, यूरोपीय जर्नल ऑफ वाइल्डलाइफ रिसर्च, 56, पृ. 829-837।

13 ब्रिटिंगहैम, एम. सी. और टेम्पल, एस. ए. (1992) “क्या सर्दियों में भोजन कराना निर्भरता को बढ़ावा देता है?”, जर्नल ऑफ फील्ड ऑर्निथोलॉजी, 63, पृ. 190-194; मैरियन, जे.; द्वोरक, आर. और मैनिंग, आर. ई. (2008) “पार्कों में वन्यजीवों को भोजन कराना: शैक्षिक हस्तक्षेपों और वन्यजीव खाद्य आकर्षण व्यवहार की प्रभावशीलता की निगरानी की विधियाँ”, ह्यूमन डायमेंशन्स ऑफ वाइल्डलाइफ, 13, पृ. 429-442।

14 कैलेंडर, एच. (1981) “सर्दियों में भोजन प्रदान करने के प्रभाव: ग्रेट टिट (Parus major) और ब्लू टिट (P. caeruleus) की जनसंख्या पर”, ऑर्निस स्कैंडिनेविका, 12, पृ. 244-248; लॉट, डी. एफ. (1996) “जंगली जानवरों को खिलाना: प्रेरणा, अंतःक्रिया और परिणाम”, एंथ्रोज़ोओस, 4, पृ. 232-236; कूपर, एस. एम. और गिन्नेट, टी. एफ. (2000) “हिरणों को अतिरिक्त भोजन कराने के संभावित प्रभाव: घोंसला परभक्षण पर”, वाइल्डलाइफ सोसायटी बुलेटिन, 28, पृ. 660-666; शोएक, एस. जे.; बोमन, आर. और रेनॉल्ड्स, एस. जे. (2004) “फ्लोरिडा स्क्रब-जे (Aphelocoma coerulescens) में शीघ्र प्रजनन के पीछे संभावित तंत्र और खाद्य पूरकता”, हार्मोन्स एंड बिहेवियर, 46, पृ. 565-573; रॉब, जी. एन.; मैकडोनाल्ड, आर. ए.; चेम्बरलिन, डी. ई.; रेनॉल्ड्स, एस. जे.; हैरिसन, टी. जे. और बियरहॉप, एस. (2008) “सर्दियों में पक्षियों को खिलाना अगले प्रजनन मौसम में उत्पादकता बढ़ाता है”, बायोलॉजी लेटर्स, 4, पृ. 220-223; जोन्स, डी. (2011) “संपर्क की भूख: हमें क्यों समझना चाहिए कि जंगली पक्षियों को भोजन कराने का प्रभाव और मूल्य क्या है”, इमू: ऑस्ट्रल ऑर्निथोलॉजी, 111, पृ. 1-7; ओर्रोस, एम. ई. और फेलोव्स, एम. डी. ई. (2012) “जंगली पक्षियों को पूरक भोजन कराना स्थानीय आर्थ्रोपोड शिकार की प्रचुरता को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है”, बेसिक एंड एप्लाइड इकॉलॉजी, 13, पृ. 286-293।