जंगल में जानवर अक्सर दुर्घटनाओं और चोटों से पीड़ित होते हैं| वे शिकारियों या सत्ता या प्रजनन के लिए होने वाले अन्तःविशिष्ट द्वंद्वों द्वारा, जंगल की आग से जलने या अचानक हुई बर्फ़बारी से जम के; कठिन जगहों जैसे कीचड़ के तालाब या जमी झीलों में फंसकर, और दर्दनाक, सुस्त मृत्यु का सामना कर घायल हो सकते हैं; या जंगल में सामान्य रूप से रहते हुए उनकी सीधे कोई दुर्घटना हो जाती है, जैसे की मनुष्यों की| हालाँकि जंगल में जानवरों के लिए मुश्किल से प्रभावी मदद उपलब्ध होती है जब वे दुर्घटना या घाव से पीड़ित होते हैं| वे ख़ुद को मज़बूत जानवर, प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों, और प्राकृतिक जालों (फंसने की जगहों) के प्रति लगभग बेबस (लाचार) पाते हैं| फिर भी, मनुष्य कभी-कभी फंसे हुए जानवरों को बचाने में सफल होते हैं, कठिन परिस्थितियों में भी|
बड़े स्तनधारी (जैसे कि हिरण और एल्क) जमी झीलों में फंस सकते हैं| वे भोजन की खोज में जमी झीलें पार कर सकते हैं, वे पानी में गिर सकते हैं जब उनके नीचे की बर्फ़ टूट जाती है| यदि बर्फ़ कठोर नहीं है, तो पानी से बाहर निकलने का उनका प्रयास आसानी से और बर्फ़ तोड़ेगा| ख़ुद को मुक्त करने में असमर्थ, वे अल्पतप्तता से मर सकते हैं| स्तनधारियों में अल्पतप्तता के लक्षणों में कांपना, दुविधा, आलस और कमज़ोरी, ह्रदय दर में कमी, सांस फूलना और रक्तचाप और अंततः अचेत अवस्था और मृत्यु शामिल हैं| वैकल्पिक रूप से, वे झटकों, अंगों का काम ना करना, थकान, डूबना, भूख, अन्य जानवरों द्वारा खाए जाने या छूटने के प्रयास में होने वाली चोटों के कारण मर सकते हैं| कभी-कभी यदि बर्फ़ ना टूटे तो भी, वे जमी सतह पर अपना नियंत्रण खो सकते हैं| अपना नियंत्रण पुनः प्राप्त करने में असमर्थ, वे जमीन से काफ़ी दूर बर्फ़ में फंस सकते हैं| इन परिस्थितियों से जानवरों को बचाने के कई मामले दर्ज किये गए हैं|
ठन्डे क्षेत्रों में जानवर बर्फ़ के टुकड़ों पर फंस सकते हैं और तट से काफ़ी दूर जा सकते हैं, बर्फ़ पिघलने और उनके डूबने या ठन्डे पानी में अल्पतप्तता से मर जाने तक डरे हुए (रहते हैं) कभी-कभी इन जानवरों की मदद करना संभव है|
समुद्री बर्फ़ द्वारा भी व्हेल फंस सकती हैं| उनके आसपास बर्फ़ मोटी होने पर, व्हेल गहरे पानी से अलग हो सकती हैं| ऐसा होने पर वे डूबने, दम घुटने या भूख से मर सकती हैं| हालाँकि किनारों पर फंसने से बहुत कम, बर्फ़ में व्हेल मछलियों के फंसने की दर बढती हुई नज़र आती है|1 तट पर फंसी व्हेल को बचाने की बजाय बर्फ़ में फंसी व्हेल को बचाना अक्सर कठिन होता है, हालाँकि यहाँ सफल बचाव कार्य हुए हैं जैसे बर्फ़ तोड़ने की नाव, बर्फ़ तोड़ने की मशीन, हेलीकाप्टर बचाव कार्य, और साँस लेने के छेद खुले रखने के लिए आरी का इस्तेमाल|
यहाँ कीचड़ के तालाब में फंसे जानवरों को बचाने के मामले दर्ज हैं। यह बारम्बार रूप से ज़्यादातर बड़े जानवरों जैसे हाथियों के साथ होता है| हाथी अक्सर अपनी त्वचा को कीड़ों या सूर्य से बचाने के लिए, या अच्छा महसूस करने के लिए कीचड़ के तालाबों में नहाते हैं| कभी-कभी वे कीचड़ में फंस जाते हैं| इन परिस्थितियों में, वे डूबना, दम घुटना या अन्य जानवरों द्वारा धीरे-धीरे खाए जा सकते हैं| पक्षी, जो उड़ सकते हैं वे भी कीचड़ में फंस सकते हैं| वे भी अक्सर बचाए जा सकते हैं|
बड़े समुद्री जीव जैसे डॉलफिन या व्हेल कभी-कभी दुविधा में आ सकते हैं और किनारों पर फंस सकते हैं| इस तरह की स्थितियों में यह निश्चित है कि जानवर मर जायेगा| हालाँकि, पारंपरिक रूप से, जब वे ख़ुद को बचाने के बिना किसी संभावित अर्थ के इस तरह से फंस जाते हैं, तो मनुष्य अक्सर उन्हें उनके मांस या चर्बी के लिए निकाल लेते हैं| हालाँकि, हाल ही में इन जानवरों के प्रति नज़रिये में बदलाव आया है, और कुछ मामलों में मनुष्य उनकी मदद करते हैं| और हालाँकि हमेशा तो नहीं पर, कभी-कभी हम उनकी जान बचाने में सफल रहे हैं|
अन्य जानवरों को बचाना ज़रूरी हो सकता है जब वे प्राकृतिक आपदाओं के शिकार होते हैं, जैसे मनुष्य या घरेलू जानवर उनकी परिस्थितियों में होंगे| वे बाढ़ द्वारा दूर बहाए या डुबाये जा सकते हैं; तूफ़ान द्वारा चकनाचूर; भूस्खलन, हिमस्खलन, और भूकंप द्वारा दफ़न हो सकते हैं| बहुत से जानवर इन प्राकृतिक आपदाओं में मर जाते हैं| कई मामलों में, प्राकृतिक आपदाओं द्वारा जंगल में प्रभावित जानवरों की गंभीर स्थिति को आमतौर पर नज़रंदाज़ किया जाता है| संयोग से, हालाँकि यह हमेशा का मामला नहीं है| यहाँ कई मामले हैं जिनमें इन परिस्थितियों में मनुष्यों ने जानवरों की मदद की है| ये मामले दिखाते हैं कि मनुष्य प्राकृतिक आपदाओं द्वारा प्रभावित जानवरों की मदद करना चाहते हैं और कर सकते हैं| इसके अलावा, यहाँ कुछ संकेत हैं कि आम जनता प्राकृतिक आपदाओं में जंगली जानवरों की पीड़ा के बारे में और ध्यान देने की ओर अग्रसर हैं|
प्रकृति में नियमित रूप से आग लगती है| कुछ मनुष्यों द्वारा लगाई जाती है, अचानक या जानबूझ कर| अन्य के प्राकृतिक कारण हैं| प्राकृतिक रूप से आग बिजली गिरने, ज्वालामुखी, या भूकंप से लग सकती है| ज़ाहिर है, हम जानवरों की कितनी परवाह करते हैं इससे इतर आग कैसे लगी यह अलग बात है| तब हमारा प्रारंभिक ध्यान आग में फंसे जानवरों को पीड़ा या मृत्यु से बचाने में मदद करना होगा| कभी-कभी उनकी मदद करना संभव है, और वास्तव में यहाँ कई मामले हैं जिनमें यह पहले ही किया जा चुका है|
यहाँ ऐसे मामले भी हैं जिनमें आग के प्रभाव से जानवरों की मदद की गई या बचाया गया है| ये प्रयास लोगों के चाहने या अधिक दिखने वाले जानवरों पर ध्यान देने के साथ किये गए हैं, किन्तु यह दिखाता है कि इन जानवरों की मदद करना कैसे संभव है| उदाहरण के लिए, यहाँ जंगल की आग से बचाए गए कई कोआला के मामले हैं| वे धीरे-धीरे चलते हैं इसीलिए वे आग से जल्दी नहीं भाग सकते| उनका प्रतिरक्षा तंत्र भी कमज़ोर होता है, जिसका अर्थ है कि यदि वे आग से जल कर बच जाते हैं, तो संभव है कि वे संक्रमण से बच जायेंगे| हज़ारों कोआला हर साल ऑस्ट्रेलिया की आग में मर जाते हैं|2 उन्हें बचाना दूसरों को बचने की बजाय आसान हो सकता है जो छोटे हैं या जिन्हें पकड़ना अधिक कठिन है, जिससे जो लोग अन्य जानवरों को बचाने में समर्थ नहीं होंगे, जिन्हें बचाया गया है|
अन्य उदाहरण जहाँ कई स्वयंसेवियों ने जानवरों को बचाने का प्रयास किया, वर्ष 2019 में बोलीविया की भीषण आगजनी में हुआ, परिणामस्वरूप कई जानवरों को बचाया गया|
आसान तरीकों से भी जानवरों की मदद करना संभव है| उदाहरण के लिए, वर्ष 2019 में दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया की आगजनी के दौरान, वाइल्ड केयर ऑस्ट्रेलिया (एक संस्था जो जंगली जानवरों को बचाना और पुनर्वास करती है) ने प्रभावित इलाकों में रहने वाले इंसानों को जागरूक किया कि वे जंगली जानवरों की पहुँच में पानी के बर्तन रखें|3
यहाँ कई मामले हैं जिनमें बाढ़ के दौरान जानवरों को बचाया गया है| इसका एक उदाहरण भारत में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में हुआ| यह उद्यान असम क्षेत्र में स्थित है, जो कि नियमित बाढ़ से ग्रस्त है| यह क्षेत्र पहाड़ों से घिरा है, इसलिए भारी बारिश होने पर यह पहाड़ों से तेज़ी से नीचे आती है, और राष्ट्रीय उद्यान सहित समतल इलाकों में बाढ़ लाती है| वर्ष 2019 की बाढ़ में हिरण, गैंडे, भैंस, सूअर, और एक हाथी सहित लगभग 200 जानवर मारे गए|4
एक अधिक व्यवस्थित बचाव उद्यान कृत्रिम रूप से ऊंची ज़मीन पर बनाया गया, ऊँची ज़मीन वाले इन क्षेत्रों ने जानवरों को बढ़ते पानी से बचने में सुरक्षित जगह खोजने हेतु अधिक आसानी उपलब्ध कराई| ऊँची ज़मीन के निर्माण को वार्षिक बाढ़ों में मरने वाले जानवरों की संख्या को कम करने का श्रेय दिया गया है: वर्ष 2017 की बाढ़ में मारे गए 400 जानवरों की तुलना में, वर्ष 2019 में लगभग 200 जानवर मारे गए|5
स्वतंत्र संस्थाओं ने भी इन परिस्थितियों में जानवरों को बचाने में अक्सर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है| इसका एक उदाहरण वर्ष 2019 में वर्जिनिया में अर्लिंगटन काउंटी में मूसलाधार बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ थी| इस कारण से, कई जंगली जानवर तूफ़ान के कारण अनाथ हो गए, जब वे बाढ़ के पानी से उनके घोंसलों से फेंक दिए गए या अपने माता-पिता से अलग हो गए| अर्लिंगटन के एनिमल वेलफेयर लीग के साथ बचाव कर्मी हिरणों और दर्ज़नों पक्षियों और गिलहरियों सहित दर्ज़नों जानवरों को बचाने में समर्थ रहे|6
कुछ मामलों में लोग स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं, संस्थाओं या सरकारी शाखाओं की मदद के बिना जानवरों की मदद की जा सकती है| वर्ष 2016 में मिसिसिप्पी में अचानक आई बाढ़ ने कई जानवरों को डूबने के ख़तरे पर ला दिया| दो भाइयों ने अपने घर के बाहर बाढ़ से भरे जंगल में से सूखे स्थान की ओर निकलते जानवरों को देखा| उनके पास एक छोटी नाव थी और उन्होंने बाढ़ में फंसे जानवरों को बचाने का निर्णय लिया| बाढ़ग्रस्त मैदानों से जंगलों तक जाते हुए, उन्होंने कई चूहों, छछूंदर और खरगोशों को बचाया| जंगल में जाने पर, वे छोटी नाव में गए और बढ़ते पानी में जानवरों को ढूँढा| वे कई ओपोसम और अर्मादिलो को बचाने और बाढ़ का पानी घटने पर उन्हें छोड़ने में सफल रहे|7 यह कपीहानी दिखाती है कि कुछ लोगों के समूह के लिए कठिनाई में जानवरों को बचाना पूरी तरह संभव है|
कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं से जानवरों को बचाया जा चुका है, जैसे तूफ़ान, भूकंप, सुनामी, भूस्खलन, हिमस्खलन, और ज्वालामुखी| जंगल में रहने वाले जानवरों के लिए तूफ़ान भयानक होते हैं| मनुष्यों और उनके साथ रहने वाले जानवरों से परे, जंगल में रहने वाले जानवरों के पास तूफ़ान के प्रभाव से बचने के लिए पर्याप्त आवास नहीं है| वर्ष 2019 में दक्षिण कैरोलिना, वाल्टरबोरो में डोरियन तूफ़ान द्वारा घायल, बेघर, अनाथ, या अन्य रूप से प्रभावित सैकड़ों जानवर एक अभ्यारण्य द्वारा बचाए गए| टूटे पैर, सिर दर्द, और फेफड़ों के संक्रमण सहित चोटों को त्वरित प्रतिजैविक उपचार की आवश्यकता होती है|
वर्ष 2018 में इंडोनेशिया में सुनामी ने कच्छपों को किनारों पर ला दिया, उन्हें समुद्र से एक किलोमीटर तक दूर करते हुए| बचाव कर्मियों ने उन्हें वापस समुद्र तक पहुँचाने के लिए अस्थायी पालकी बनाई|
ज्वालामुखी विस्फ़ोट जानवरों को सीधे लावा और राख से दबा कर मार सकते हैं, और आसपास के इलाकों में फंसे जानवरों को हानि पहुंचा सकते हैं| वे गिरती राख द्वारा जल सकते हैं, या राख खा लेने (आमतौर पर राख से ढंकी घास खा कर) या सांस ले लेने से बीमार हो सकते हैं| वर्ष 2018 में फिलिपींस में हुए एक विस्फोट के बाद, कई घरेलू जानवर चोट, बीमार, भूख या मृत्यु के ख़तरे पर थे| विश्व पशु सुरक्षा ख़तरे वाली जगहों से जानवरों को खाली जगहों पर ले गए, और जिन्हें ज़रुरत थी उन्हें भोजन और चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया|8
जलीय जानवर भी ज्वालामुखी विस्फोट द्वारा प्रभावित होते हैं, जब लावा के छोटे कण जल के संपर्क में आते हैं, जो कि जलीय जानवरों के फेफड़ों के लिए हानिकारक है| जल पर बहता लावा अम्लता के स्तर को भी बढ़ा सकता है जो उस क्षेत्र में जलीय जानवरों के लिए हानिकारक हो सकता है|9 बड़े जलीय जानवर जैसे समुद्री कच्छप आसमान से देखे और बचाए जा सकते हैं, या निकटतम किनारों से बचाये जा सकते हैं जो अभी तक विस्फ़ोट से प्रभावित नहीं हुए हैं|
ऊपर दिए गये उदाहरण दिखाते हैं कि मनुष्य प्राकृतिक आपदाओं की श्रंखला से जंगल में जानवरों को बचाने में समर्थ हैं, वे आपदाएं जिनसे अक्सर वे बिना हमारी मदद के नहीं बच सकते| हालाँकि, ज्यादातर हिस्सों में, हमारे बचाव कार्य जंगल में रहने वाले जानवरों की बजाय घरेलू जानवरों पर केन्द्रित हैं| यदि हम प्रजातिवाद को अस्वीकार करते हैं, तो हमें जंगल में रहने वाले और जानवरों को शामिल करने के लिए हमारी बचाव योजनाओं का विस्तार करना चाहिए| इसका अर्थ यह भी है कि जानवरों को बचाने के तरीकों के साथ आना- उदाहरण के लिए, कैसे हम झील या उथले पोखर में मछलियों को बचाना जो लावा द्वारा ढंकी या उबलने के कारण ख़तरे में हैं? हम जानवरों को भूकंप से कैसे बचा सकते हैं, जो आने से पहले ज़रा भी चेतावनी नहीं देते?
1 मैथ्यूज़, सी. जे. डी.; रैवर्टी, एस. ए.; नॉरेन, डी. पी.; अर्रागुटाइनाक, एल. एवं फर्ग्युसन, एस. एच. (2019) “आइस एंट्रैपमेंट मृत्यु दर आर्कटिक किलर व्हेल्स की बढ़ती उपस्थिति को धीमा कर सकती है”, पोलर बायोलॉजी, 42, पृ. 639-644। हालाँकि, जब बहुत से लोग फँसे हुए जानवरों के बारे में सोचते हैं तो वे सबसे पहले तथाकथित पालतू जानवरों के बारे में सोच सकते हैं, लेकिन हम देख सकते हैं कि जो जानवर जंगल में रहते हैं उन्हें कहीं अधिक बार सहायता की आवश्यकता होती है।
2 कोआला इंफो (2019) “कोआला और ऑस्ट्रेलिया की जंगल की आगें” [13 सितम्बर 2019 को अभिगमित]।
3 गेरोवा, वी. (2019) “कोआला माँ और बच्चा जंगल की आग में फँसने से बचाए गए”, 10 डेली, 7 सितम्बर।
4 गुहा, एन. एवं घोष, एस. (2019) “वार्षिक बाढ़ के दौरान असम में वन्यजीव और लोग मिलकर काम करते हैं”, मोंगाबे, 23 जुलाई [16 सितम्बर 2019 को अभिगमित]।
5 वही स्रोत।
6 एरी (2019) “बाढ़ के दौरान जंगली जानवर और पालतू पशु बचाए गए”, एआरएलनाउ, 26 जुलाई [21 सितम्बर 2019 को अभिगमित]।
7 आकांदे, ज़ेड. (2016) “आदमी अचानक आई बाढ़ में कूदा, अपनी नाव जानवरों से भर ली”, द डोडो, 03/11/2016 [21 सितम्बर 2019 को अभिगमित]।
8 वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन (2018) “मायोन ज्वालामुखी विस्फोट के बाद फ़िलीपीन्स में जले और घायल जानवरों को बचाना”, 31/01/2018 [2 अक्टूबर 2019 को अभिगमित]।
9 शेन, एम. (2018) “धरती पर नरक! हवाई ज्वालामुखी विस्फोटों ने आकाश को आग लगा दी और यह सामने आया कि इस आपदा का प्रभाव समुद्री और वन्यजीवों पर दशकों तक पड़ेगा”, डेली मेल, 9 जून [2 अक्टूबर 2019 को अभिगमित]।