जंगली जानवरों की पीड़ा पर वीडियो पाठ्यक्रम – पाट 5

जंगली जानवरों की पीड़ा पर वीडियो पाठ्यक्रम – पाट 5

 



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द्वंद्व (लड़ाइयाँ)

पिछले खंड में, हमने जानवरों के बीच होने वाले एक बहुत ही सामान्य प्रकार के संघर्ष को देखा था: परजीविता। इस अध्याय में, हम उन अन्य संघर्षों को देखेंगे जो अक्सर जानवरों के बीच होते हैं और जिनके कारण गंभीर हानि हो सकती है। सबसे पहले, हम उन संघर्षों को देखेंगे जो एक ही प्रजाति के जानवरों के बीच होते हैं। उसके बाद, हम उन हानियों पर नज़र डालेंगे जो अन्य प्रजातियों के जानवरों के साथ संघर्ष के कारण होती हैं।

अंतरजातीय द्वंद्व

जानवरों में उनकी अपनी प्रजाति के अन्य सदस्यों के साथ विभिन्न प्रकार के द्वंद्व हैं| जानवर समूह में सुरक्षित भोजन, सत्ता, प्रजनन, या सामाजिक स्तर के लिए लड़ते हैं| कुछ जानवर अपनी ही प्रजाति के सदस्यों को खाते हैं| लड़ाई का परिणाम चोट लगना या मौत हो सकती है| हम इनमें से कुछ हानियों पर ध्यान देंगे|

अधिकार क्षेत्र के लिए लड़ाई

क्षेत्रीयता अन्तःविशिष्ट द्वंद्व का एक प्रचारित कारक है| यह तब होता है जब एक व्यक्तिगत जानवर अन्य जानवरों के एक ख़ास क्षेत्र में अतिक्रमण करने को रोकते हैं, और जिसके चलते वे भोजन की विशेष उपलब्धता, आवास बनाना, या साथी बनाना व्यवस्थित करते हैं| जानवर बंटवारा करने और अपनी सत्ता (क्षेत्र) को सुगंधों, से आवाज़ों से बचाने के लिए कई प्रकार के तरीके इस्तेमाल करते हैं| कभी-कभी, हालाँकि, जानवर अपने क्षेत्र का बचाव करने के लिए बल का इस्तेमाल करते हैं, और इसका अर्थ है कि चोट लगने का ख़तरा या यहाँ तक कि मौत होने का ख़तरा रक्षक या अतिक्रमी को होता है|1

पक्षी

पक्षियों की कई प्रजातियाँ क्षेत्रीयवादी हैं, कम से कम प्रजनन के दौरान, और कुछ अपने क्षेत्र के बचाव के लिए लड़ेंगे|2 ये लड़ाइयाँ हिंसक हो सकती हैं, एक या दोनों पक्षों को दर्दनाक घाव देते हुये| कस्तूरी पक्षी अत्यंत क्षेत्रीयवादी होते हैं, अपनी सत्ता के लिए लड़ने वाले नर और मादा दोनों के लिए|

स्तनधारी

चिम्प्स के बीच अन्तर्समूह हिंसा सामान्य है| ऐसे द्वंद्व सत्ता का नियंत्रण और जननक्षम मादाओं के अपहरण के आसपास होते हैं| बड़ी बिल्लियाँ अधिकतर क्षेत्रीय होती हैं| बाघ आमतौर पर अकेले रहते हैं, व्यक्तिगत क्षेत्रीयता बनाते हुए| सामान्यतः, सत्ता के लिए हुई लड़ाई के परिणाम में कमज़ोर इकाई समर्पण करती है, हालाँकि कभी-कभी चोट लगना या मृत्यु भी इसका अंत हो सकता है|3

कीड़े

चीटियों की कई प्रजातियाँ बहुत क्षेत्रीय होती हैं| शहद चीटियों के पास विशेषज्ञ कार्यकर्ता हैं जिन्हें रेप्लेट्स कहते हैं| रेप्लेट्स अन्य कार्यकर्ताओं द्वारा भोजन कराये जाते हैं और कोठार को रहने के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिसमें ठण्ड के मौसम के लिए शहद का भण्डारण करती हैं| जब एक समूह महत्वपूर्ण रूप से दूसरे समूह से मज़बूत होता है, तो यह कमज़ोर समूह पर छापा मारता है, रानी मधुमक्खी को मार देते या दूर भगा देता है, कार्यकर्ताओं को ग़ुलाम बनाता है और शहद की धनि रेप्लेट्स को उनके अपने समूह को खिलाने के लिए पकड़ लेता है|4 शहद पाने के क्रम में, कार्यकर्ता रेप्लेट्स के पेट को चबा जाते हैं|

बहुसंगमन

Polygamy (बहुसंगमन) एक प्रजनन तंत्र है जिसमें एक अकेला नर रहता है और कई मादाओं के साथ विशिष्ट तरह से प्रजनन करता है| यह तंत्र हाथी सील, गोरिल्ला, तीतर, और लंगूरों में देखा गया है| चूँकि अधिकतर प्रजातियों में नर और मादाओं की संख्या लगभग समान होती है, बहुसंगमन प्रजनन तंत्र मादाओं को प्राप्त करने के लिए नरों के बीच प्रतियोगिता की और ले जाता है| हाथी सील समुद्र तट पर नियंत्रण के लिए लड़ते हैं और इसके बाद उस क्षेत्र में मादाओं के साथ प्रजनन के अलग अधिकारों के लिए| एक सफल नर के हरम में 100 मादाएं तक हो सकती हैं, जबकि अधिकतर नरों के पास प्रजनन के लिए एक मौका भी नहीं होगा| नरों के बीच होने वाली लड़ाइयाँ हिंसक हो सकती हैं, विशेषकर तब जब नर समान बल के हों|

यौन ज़बरदस्ती

बच्चे होना आमतौर पर नर की बजाय मादाओं के लिए संसाधनों का अधिक बड़ा निवेश है–वे मादाएं हैं जो गर्भ धारण करती हैं या अंडे देती हैं, जो ज़्यादातर अभिभावक बनकर देखभाल करती हैं, स्तनधारियों में वे अपने बच्चों को दूध उपलब्ध कराती हैं| नर का ऊर्जा और संसाधनों का निवेश काफ़ी कम है| इसके बाद नर एक पुनरुत्पादक योजना अपनाने की ओर जाते हैं जिसका उद्देश्य उनके साथियों की संख्या बढ़ाना होता है, जबकि मादाएं कम संख्या के, उच्च गुणवत्ता वाले साथी अपनाने की ओर जाने की योजना अपनाती हैं| नर मादाओं को उन पर शारीरिक बल से प्रजनन के लिए बाध्य कर, उनके माँ बन जाने तक उन्हें उत्पीड़ित कर, या प्रजनन के लिए मन करने पर सज़ा देकर उन्हें उनके साथ सम्बन्ध बनाने को बाध्य करते हैं|

कीटों, मछलियों, पक्षियों, वाटरफाउल की कुछ प्रजातियों, बॉटल नोज डॉलफिन, और नर वानरों सहित जानवरों की कई प्रजातियों में यौन ज़बरदस्ती सामान्य है| शिकार आमतौर पर संघर्ष करता है छूटने का प्रयास करता है और अक्सर शिकारी द्वारा निश्चेत (सुन्न) कर दिया जाता है| कुछ मामलों में, वाटरफाउल में, यह चमड़ी उधेड़ने (सिर पर से त्वचा उतारना) से गंभीर चोट का परिणाम होता है| बलात्कार के प्रयास व्यक्तिगत या समूहों में हो सकते हैं, जैसे “बलात्कार उड़ानें” जो नर बत्तख के समूहों द्वारा की जाती हैं| इसमें चोट का ख़तरा अधिक है और आक्रमण झेलने वाले जानवर को चोट की यह गंभीरता डूबने की ओर ले जा सकती है |5

सामाजिक स्तर

सामाजिक जानवरों में, सामाजिक स्तर महत्वपूर्ण है क्योंकि उच्च स्तर प्रजनन की बेहतर उपलब्धता और भोजन और सत्ता के संसाधनों को पूरा कर सकती है| चिम्पान्जियों को सामाजिक स्तर, प्रजनन अधिकारों, उपरी राजनैतिक शक्ति संघर्ष के लिए अपने समूहों के अन्य सदस्यों की हत्या करते हुए देखा गया है| कभी-कभी शक्ति संघर्ष में हारने वाला दूर भगा दिया जाता है, और कभी-कभी हमला कर या मार दिया जाता है|

नरभक्षिता और भ्रूण हत्या

नर भक्षिता प्रकृति में सामान्य है| कई मामलों में, नर भक्षिता शिशुओं पर की जाती है| कुछ मामलों में, यह प्रतिद्वंद्वी की संतति को निकालने के लिए की जाती है| अन्य मामलों में, मारने वाले अभिभावक होते हैं, और कभी-कभी अपने ख़ुद के बच्चों को खा जाते हैं|

यह व्यव्हार मछलियों, पक्षियों, चूहों, स्लोथ, और बीटल्स में देखा गया है| यह हमेशा ही स्पष्ट नहीं है कि अभिभावक अपने बच्चों को क्यों मार देते हैं| कुछ मामलों में, यह उनके नुकसान को कम करना या “ख़राब निवेश” में जाती अपनी ऊर्जा का पुनर्ग्रहण करना हो सकता है, उदाहरण के लिए यदि शिशु बहुत धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं, बीमार हैं, या उनके लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं है| कठिन पर्यावरण परिस्थितियों के कारण माता-पिता भूखे और तनाव में हो सकते हैं| कुछ मामलों में, माता-पिता अपने बच्चों को मार देते हैं ताकि वे बेहतर नस्लों के लिए “पुनः कोशिश” कर सकने के लिए प्रजनन हेतु ख़ुद को उपलब्ध करा सकें|

भाइयों में प्रतिद्वंद्व

जब कभी एक बार में एक जानवर के पास कई बच्चे होते हैं, तो वहां भाई प्रतिद्वंद्विता की सम्भावना है| भोजन और अभिभावक का ध्यान सीमित है| संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता ना होने की स्थितियों में, या तो खराब पर्यावरण परिस्थितियों या नस्ल की बड़ी संख्या के कारण, भाइयों को उनके लिए ज़रूरी संसाधन के लिए एक-दुसरे से प्रतियोगिता करनी पड़ती है|

भाई-बहनों को मारना पक्षियों में अक्सर देखा गया है| नाज़्का बूबीस बड़े समुद्री पक्षी हैं और चूज़े लगभग हमेशा ही भाई-बहनों की हत्या में शामिल होते हैं| माँ हर एक बार एक या दो अंडे देती है| पहला चूजा दुसरे के पैदा होने के लगभग पांच दिन पहले पैदा होता है, और लगभग निरपवाद रूप से छोटे भाइयों को घोंसले से बाहर निकाल के मार देता है|6

चित्तीदार लकड़बग्घे के बच्चे खुली आँखों और विकसित दांतों के साथ पैदा होते हैं, और जन्म लेने के तुरंत बाद एक-दूसरे से लड़ना शुरू कर देते हैं|7 ये लड़ाइयाँ स्तर तय करने के लिए होती हैं, किन्तु तीव्र भोजन प्रतियोगिता में उनकी मौत हो सकती है| हो सकता है मज़बूत बच्चा कमज़ोर को सीधे ना मारे, किन्तु वे उनकी माँ के दूध की उपलब्धता को सीमित कर सकते हैं, अंततः भूख से वो मर जाते हैं।

अन्य प्रजाति के जानवरों द्वारा जानवरों का मारा जाना

विभिन्न प्रजातियों के जानवरों के बीच द्वंद्व बहुत सामान्य है| ज़ाहिर है इसका एक उदाहरण कुछ जानवरों का दूसरे जानवरों द्वारा मारा जाना है, हालाँकि यहाँ अन्य प्रकार के द्वंद्व भी हैं| जानवरों की मौजूद बहुत बड़ी संख्या अकशेरुकियों की है, जिसके कारण इस प्रकार के द्वंद्व उनके बीच काफ़ी ज्यादा हैं| जानवर कई तरीकों से मारे या खाए जा सकते हैं| शिकार के मरने में लगने वाला समय भी बदलता है| कभी- कभी अकशेरुकियों जैसे छोटे जानवर, अन्य जानवरों के उपापचयी एंजाइम द्वारा भी मारे जा सकते हैं जो जानवर के शरीर को तरल रूप में तोड़ना शुरू कर देता है| विष के प्रकार और पकडे गए जानवर के आकर और प्रजाति पर निर्भर करता है कि इस प्रक्रिया के दौरान वे जीवित रहने और दर्द सहने में समर्थ हैं| कुछ अन्य मरने की बजाय जीवित रहने के दौरान ही खा लिए जाते हैं| उनके बीच, कुछ जीवित निगल लिए या पचा लिए जा सकते हैं, जबकि अन्य की जीवित रहते हुए ही अंतड़ियाँ निकाली जा सकती हैं|

पकड़े जाने से बचे रहने वाले जानवर भी अन्य जानवरों की उपस्थिति से कई प्रकार से पीड़ित होते हैं जिन्हें वे अपने वातावरण में भयकारक की तरह पाते हैं| जब वे उनके साथ एक वातावरण साझा करते हैं, वे मानसिक तनाव से पीड़ित हो सकते हैं, साथ ही साथ खराब पोषण के कारण क्योंकि वे उन जगहों में चरने का साहस नहीं करते जहां वे बहुत दृश्य होते हैं|

शिकार एक ख़तरनाक क्रियाकलाप है| शिकारियों का शिकार करने के दौरान घायल होना या मारा जाना सामान्य है| कठिन इलाकों में अधिक तेज़ी से पीछा करने से खुर खो कर घायल हो वे पीड़ित हो सकते हैं| यदि चोट पर्याप्त गंभीर हो, तो जानवर भूख से मर सकते हैं|


 

टिप्पणियाँ

1 हैरिंग्टन, एफ. एच. एवं मेक, एल. डी. (1979) “भेड़ियों का हुंकारना और क्षेत्रीय संरक्षण में इसकी भूमिका”, बिहेवियर, 68, पृ. 207-249; बेगोन, एम.; टाउनसेंड, सी. आर. एवं हार्पर, जे. एल. (2006) पारिस्थितिकी: व्यक्तियों से पारिस्थितिक तंत्र तक, ऑक्सफ़ोर्ड: ब्लैकवेल, पृ. 132-133।

2 रिचिसन, जी. (2009) “पक्षियों के क्षेत्र”, ईस्टर्न केंटकी यूनिवर्सिटी [16 अगस्त 2019 को अभिगमित]।

3 माज़ाक, वी. (1981) “पैंथेरा टाइग्रिस”, मैमेलियन स्पीशीज़, 152, पृ. 1-8।

4 होल्डोब्लर, बी. (1976) “रेगिस्तानी चींटी में प्रतियोगिताएँ और दासता”, साइंस, 192, पृ. 912-914; होल्डोब्लर, बी. (1981) “शहद चींटी माइर्मेकोसिस्टस मिमिकस व्हीलर (हाइमेनोप्टेरा: फॉर्मिसिडे) में भोजन की खोज और स्थान-कालिक क्षेत्र”, बिहेवियरल इकॉलॉजी एंड सोशियॉबायोलॉजी, 9, पृ. 301-314।

5 मैकिन्नी, एफ. एवं एवर्ट्स, एस. (1998) “जलपक्षियों और अन्य पक्षियों में यौन उत्पीड़न”, ऑर्निथोलॉजिकल मोनोग्राफ्स, 49, पृ. 163-195; कॉनर, आर. एवं वोल्मर, एन. (2009) “डॉल्फ़िन सहयोगों में यौन उत्पीड़न: चिंपांज़ियों के साथ तुलना”, मुलर, एम. एन. एवं रैंगहैम, आर. डब्ल्यू. (संपा.) प्राइमेट्स और मनुष्यों में यौन उत्पीड़न: नर आक्रामकता का मादा के विरुद्ध एक विकासवादी दृष्टिकोण, कैम्ब्रिज: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, पृ. 218-243; गार्नर, एस. आर.; बोर्तोलुज़्ज़ी, आर. एन.; हीथ, डी. डी. एवं नेफ़, बी. डी. (2010) “यौन संघर्ष चिनूक सैल्मन में मादा की प्रमुख प्रतिरक्षा संगतता परिसर असमानता के लिए साथी चयन को रोकता है”, प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द रॉयल सोसायटी बी: बायोलॉजिकल साइंसेज़, 277, पृ. 885-894; हान, सी. एस. एवं जब्लोंस्की, पी. जी. (2010) “नर वाटर स्ट्राइडर्स मादा को संभोग के लिए डराने हेतु शिकारी को आकर्षित करते हैं”, नेचर कम्यूनिकेशन्स, 1, आ. 52।

6 एंडरसन, डी. जे. (1990) “बूबीज़ में अनिवार्य भ्रातृहत्या का विकास: बीमा अंडा परिकल्पना का परीक्षण”, दि अमेरिकन नैचुरलिस्ट, 135, पृ. 334-350।

7 फ़्रैंक, एल. जी.; ग्लिकमैन, एस. ई. एवं लाइट, पी. (1991) “नवजात चित्तीदार लकड़बग्घों में घातक भ्रातृ आक्रामकता, शीघ्र विकास और एंड्रोजन”, साइंस, 252, पृ. 702-704।