प्रासंगिकता से तर्क

ऐसे लोग भी हैं जो तर्क देते हैं कि पूर्ण रूप से सम्मानित होने के लिए, उस प्राणी को मानव प्रजाति से संबंधित होना चाहिए| इसके अलावा, जो लोग अमानवीय जानवरों के पूर्ण नैतिक विचार को अस्वीकार करते हैं, वे कभी-कभी एक पर्यावरणवादी दृष्टिकोण को बनाए रखते हैं जो जानवरों की भलाई से कुछ अलग है, जैसे कि विशेष पारिस्थितिक तंत्र या प्रजातियों के संरक्षण ।

प्रासंगिकता के तर्क से पता चलता है कि इसमें से कोई भी सही नहीं हो सकता है । संक्षेप में, प्रासंगिकता से तर्क यह दावा करता है कि जब किसी का सम्मान करने की बात आती है तब हमे किसी अन्य स्थितियों या परिस्थितियों को ध्यान में रखने के बजाय, इस बात का ध्यान रखना चाहिए की कैसे हमारे कार्यों या चूक से प्राणियों पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव हो सकता है; और यह कि सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित होने के लिए, किसी प्राणी को केवल संवेदनशील होने की आवश्यकता है । संवेदना के अलावा अन्य सुविधाएँ और परिस्थितियाँ वास्तव में मायने नहीं रखती हैं । आइए अब देखें कि यह तर्क अधिक विस्तार से कैसे काम करता है । तर्क के दो भाग हैं ।

 

हमें इस बात पर विचार कर, ध्यान रखना चाहिए कि हम दूसरे प्राणियों को कैसे लाभ और हानि पहुँचा सकते हैं

नैतिक रूप से कुछ प्राणियों पर विचार करना, अर्थात् उनका सम्मान करना, मतलब उन प्राणियों के हितों को ध्यान में रखना है जब हम यह तय कर रहे हैं कि कैसे कार्य करना है, और उनके लिए क्या करना बेहतर होगा । लेकिन वास्तव में वह क्या है जिसे हम ध्यान में रखते हैं? यह बस वह तरीका है जिसमें हमारे कार्य या चूक उन्हें प्रभावित कर सकते हैं । उदाहरण के लिए, हम यह नहीं पूछते हैं कि क्या हमें किसी विदेशी व्यक्ति के हितों को ध्यान में रखना चाहिए जब हम यह तय करने की कोशिश कर रहे होते हैं कि किसी एक किताब को पढ़ना है या नहीं, क्योंकि यह उस व्यक्ति को बिल्कुल प्रभावित नहीं करेगा । लेकिन हम उन प्राणियों को ध्यान में रखते हैं जब हम ऐसी स्थिति में होते हैं जिसमें हम उन्हें नुकसान पहुँचा सकते हैं यदि हम कुछ करते हैं तो , और हम इसे करने से बचते हैं क्योंकि ऐसा करने से उन्हें नुकसान हो सकता है । उदाहरण के लिए, यदि हम मांस खाने से मना करते हैं तो ऐसा हो सकता है क्योंकि हमें पता है कि इसके लिए किसी जानवर को मार दिया जाएगा । हम कुछ उन प्राणियों पर भी विचार कर रहे हैं जब हम जानते हैं कि यदि हम कार्य नहीं करते हैं तो उन्हें पीड़ा हो सकती है, और हम उन्हें पीड़ित होने से बचाने के लिए कार्य करते हैं । ऐसा तब होता है जब हम किसी की मदद करते हैं, जैसे कि हम किसी को डूबने से बचाते हैं ।

वास्तव में, अधिक सटीक होते हुए , इन मामलों में हम यह करते हैं, की इस पर विचार करते है कि कैसे हमारे कार्य और चूक दूसरों पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं । दूसरे शब्दों में, हम विचार करते हैं कि हम दूसरों को कैसे लाभ पहुँचा सकते हैं या उन्हें नुकसान पहुँचा सकते हैं ।

प्रजातिवाद के रक्षक अक्सर दावा करते हैं कि हमें केवल मनुष्यों की रक्षा करनी चाहिए, केवल इस कारण कि वे मानव हैं,1 या कि मनुष्यों को विशेषधिकार मिलना चाहिए कई अन्य कारणो जो पीड़ित होने या लाभान्वित होने के लिए उनकी संवेदनशीलता से संबंधित नहीं है , जैसे कि जब यह दावा किया जाता है कि जिनके पास शक्ति है उनका सम्मान किया जाना चाहिए । 2

हालांकि, प्रासंगिकता से तर्क दिखाता है कि क्या होता है अगर हम मानते हैं कि हमारे नैतिक निर्णय प्रासंगिक कारकों के आधार पर किए जाने चाहिए । फिर, अगर हम इस बारे में चिंतित हैं कि किसी को किस तरह से लाभ या पीड़ा पहुंच सकती है, तो हम जिनको ध्यान में रखते हैं, वे ऐसे होने चाहिए, जिन्हें फायदा या नुकसान हो सकता है । यदि हम इस विचार को स्वीकार करते हैं, तो हमें उपर्युक्त शर्तों को अस्वीकार करना होगा जैसे कि प्रजातियों की सदस्यता या शक्ति होना, जो कि सम्मान मिलने के लिए होना चाहिए । इसके बजाय, हम इस स्थिति का बचाव करेंगे कि जिन प्राणियों का सम्मान किया जाना चाहिए वह हैं जो पीड़ा और लाभ का अनुभव कर सकते हैं ।

यह तर्क का पहला भाग है, जिसे निम्नलिखित चार चरणों के रूप में व्यक्त किया जा सकता है:

1)हमें अपने निर्णय इस आधार पर करने चाहिए कि उनके प्रभाव क्या हो सकते हैं ।

2)जब हम किसी का सम्मान करते हैं, तो हम इस बात को ध्यान में रखते हैं कि कैसे हमारे फैसले उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं या उन्हें फायदा पहुंचा सकते हैं, और उन्हें नुकसान न पहुंचाने की कोशिश करते हैं ।

3)किसी को लाभान्वित होने या नुकसान पहुंचाने के लिए उनकी लाभान्वित होने या पीड़ित होने की क्षमता प्रासंगिक है ।

4)हमें उन प्राणियों का सम्मान करना चाहिए जिन्हें लाभ या पीड़ा हो सकती है ।

 

लाभान्वित होने और पीड़ित होने के लिए, प्राणियों को संवेदनशील होना ज़रूरी है

एक बार जब हम स्वीकार कर लेते हैं कि हमें उन प्राणियों को ध्यान में रखना चाहिए जिन्हें हानि या लाभ हो सकता है, अगला चरण स्पष्ट है; हमें यह पता लगाने की आवश्यकता है कि वह विशेषता या परिस्थिति क्या है जिनके कारण वो पीड़ित या लाभान्वित हो सकते है ।

प्रजातिवाद के कई रक्षकों का दावा है कि हमें उन प्राणियों का सम्मान करना चाहिए जिनके पास कुछ जटिल बौद्धिक क्षमताएं हैं,3 या जिनके पास दूसरों के साथ एकजुटता के कुछ विशेष संबंध हैं । 4 लेकिन इनमें से कोई भी स्थिति यह निर्धारित नहीं करती है कि किसी प्राणी को दुसरो के द्वारा हानि या लाभ पहुंचाया जा सकता है | वे बस कुछ तरीकों का निर्धारण करते हैं जिसमें किसी को नुकसान या लाभ हो सकता है । यदि किसी के पास कुछ बौद्धिक क्षमताएँ हैं, तो उसे कुछ तरीकों से नुकसान पहुँचाया जा सकता है । उदाहरण के लिए, किसी प्राणी को उन परिस्थितियों में भय महसूस कराया जा सकता है, जिनमें इन क्षमताओं के बिना वाले प्राणी पीड़ित नहीं होंगे क्योंकि वे डर महसूस करने का कारण नहीं समझेंगे । या, यदि प्राणियों के कुछ रिश्ते हैं, तो किसी को अन्य तरीकों से नुकसान पहुंचाया जा सकता है – उदाहरण के लिए, यदि किसी के दोस्त मारे जाते हैं । लेकिन किसी प्राणी को अन्य तरीकों से भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है, भले ही किसी में यह क्षमता या संबंध न हो । और यही सच है अगर हम हानि के बजाय लाभ पर विचार करते हैं । हमारी विशेष परिस्थितियां या संज्ञानात्मक क्षमताएं कुछ विशेष तरीकों को प्रभावित कर सकती हैं जिनमें हमें पीड़ा और लाभ हो सकता है, लेकिन वे यह निर्धारित नहीं करते हैं कि क्या हम पहले स्थान पर नकारात्मक और सकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैं ।

इससे पता चलता है कि संज्ञानात्मक क्षमताओं या संबंधों के आधार पर स्थितियाँ इस बात के लिए अप्रासंगिक हैं कि हमें किसी प्राणी का सम्मान करना चाहिए या नहीं । वे प्रासंगिक नहीं हैं क्योंकि यह वे परिस्तिथियाँ नहीं हैं जो किसी प्राणी को लाभ या हानि पहुंचाने के लिए आवश्यक है ।

फिर, वह क्या परिस्तिथियाँ है जो पूरी होनी चाहिए? यह जवाब देने के लिए कि हम इस बारे में सोच सकते हैं कि क्या हमारे लिए जीवन को अच्छा या बुरा बनाता है| हमारे जीवन में, सकारात्मक या नकारात्मक चीजें हमारे साथ हो सकती हैं, जैसे कि खुशी के क्षण या दुख | हमें उन्हें अनुभव करने के लिए, हमारे पास केवल दुख या आनंद का अनुभव करने की क्षमता होनी आवश्यक है । ध्यान दें कि ऐसा नहीं है कि हम बस जीवित हैं जो हमें इन अनुभवों के लिए सक्षम बनाता है । मान लीजिए कि हम अपरिवर्तनीय रूप से बेसुध हैं, लेकिन अभी भी जीवित हैं । हमारे साथ जो कुछ भी होता है वह हमारे द्वारा पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया जाएगा । इसलिए यह हमारे लिए अप्रासंगिक है कि हम अभी भी जीवित हैं । यदि हमारे पास किसी चीज का सकारात्मक या नकारात्मक अनुभव नहीं है, तो ऐसा लगता है जैसे यह हमारे साथ कभी नहीं हुआ । हमारे साथ कुछ भी अच्छा या बुरा होने के लिए, हमें संवेदनशील होना होगा । यानी हमारे पास अनुभव होने चाहिए, जो सकारात्मक या नकारात्मक हो सकते हैं|

एक प्राणी विभिन्न रुप से संवेदनशील हो सकते हैं । इस तरह के अनुभव हालाँकि, डॉल्फ़िन, कछुए और इंसानों के लिए बिल्कुल अलग हो सकते हैं । फिर भी उनके पास जो कुछ भी है वह यह है कि वे सभी व्यक्ति के लिए सकारात्मक या नकारात्मक हो सकते हैं । हालाँकि, चट्टान जैसी कोई वस्तु जो सचेत नहीं है, और इस तरह वह भावुक नहीं है, उसके साथ होने वाली सकारात्मक और नकारात्मक चीजों का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता है । यही कारण है कि किसी को हानी या लाभानवित होने के लिए, उसका संवेदनशील होना ज़रूरी है ।

तो, प्रासंगिकता से तर्क का दूसरा भाग इस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है:

4) हमें उन प्राणियों का सम्मान करना चाहिए जिन्हें लाभ या हानि हो सकती है|

5) संवेदनशील प्राणी वे निकाय हैं जिन्हें लाभ या हानि पहुँचाई जा सकती है ।

6) हमें संवेदनशील प्राणियों का सम्मान करना चाहिए ।

यह सब बहुत सरल रूप से अभिव्यक्त किया जा सकता है: किसी का सम्मान करने का अर्थ है उनकी भलाई को ध्यान में रखना, और इसके लिए संवेदना ही मायने रखती है । किसी भी अन्य परिस्तिथि के सवाल के लिए अप्रासंगिक होगा कि क्या किसी की भलाई पर विचार किया जाना चाहिए । अन्य शर्तें कुछ और के लिए प्रासंगिक हो सकती हैं (उदाहरण के लिए, निश्चित बौद्धिक क्षमता होना निश्चित रूप से किसी विश्वविद्यालय में भर्ती होने के लिए प्रासंगिक प्रतीत होता है) । लेकिन जब यह दांव पर लगा होता है तो यह ध्यान में नहीं आता है कि क्या दांव पर लगा है ।

बेशक, हम इस दावे को अस्वीकार कर सकते हैं कि हमें केवल उसी बात पर ध्यान देना चाहिए जो प्रासंगिक है| अर्थात्, हम अप्रासंगिक कारकों के आधार पर अपने निर्णय लेने का विकल्प भी चुन सकते हैं । लेकिन यह शायद ही स्वीकार्य लगता है । उदाहरण के लिए, कि ड्राइवर लाइसेंस उन लोगों को दिए गए थे जो बेरोजगार हैं, और यह बेरोजगारी लाभ उन लोगों को दिया जाये जो ड्राइव कर सकते हैं । यह बिलकुल बेतुका होगा, क्योंकि हम अप्रासंगिक कारकों के आधार पर उन निर्णयों को पूरा करेंगे । ऐसा ही तब होता है, जब संवेदना को सम्मान की कसौटी के रूप में स्वीकार करने के बजाय, हम अन्य मानदंडों को स्वीकार करते हैं, जैसे कि बौद्धिक क्षमता या एकजुटता के संबंध ।


आगे की पढ़ाई

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नोट्स

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