पर्यावरणवादी उद्देश्यों हेतु जानवरों का परीक्षण

संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा के नाम पर पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए कई जानवर मारे जाते हैं | जानवर परीक्षणों में मर सकते हैं जो क्षेत्र में किये जाते हैं | “क्षेत्र” पारिस्थितिक तंत्र के लिए अध्ययन स्वरुप है, जो वास्तव में इसमें रहने वाले जानवरों का घर (आवास) है | प्रयोगशालाओं में भी बड़ी संख्या में जानवर मारे जाते हैं जहां पारिस्थितिक तंत्र पर रसायनों के प्रभावों को पहचानने के लिए उनका परीक्षण किया जाता है |

पर्यावरण सम्बन्धी समूहों के अलावा, इस तरह के अनुसंधान में पर्यावरण सुरक्षा संस्था और यू. एस. मत्स्य और वन्यजीव सेवा सहित, कुछ सरकारी संस्थाएं शामिल हैं |

एक मुख्य पर्यावरणवादी संस्था जिसने मजबूती से जानवरों के परीक्षण को बढ़ावा दिया है, विश्व वन्यजीव संघ (डब्ल्यू डब्ल्यू एफ) है | पर्यावरण पर विभिन्न रसायनों के प्रभाव के परीक्षण हेतु बड़ी संख्या में जानवरों पर और अधिक परीक्षण के लिए इस समूह ने विश्व भर में बड़े पैमाने पर जनमत तैयार किया है | इन गतिविधियों के कारण, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की उन संस्थाओं द्वारा घोर आलोचना की गई है जो अमानुष जानवरों कि पक्षधर हैं |

अन्य पर्यावरणवादी प्रतिपालन संस्थाएं जो जानवरों पर परीक्षण का समर्थन करती हैं, संरक्षण प्रयासों और जानवरों के बचाव जैसे कि संवेदनशील प्राणी, के बीच एक स्पष्ट द्वंद्व प्रदर्शित करते हैं | इन इकाइयों में पर्यावरण सुरक्षा फण्ड (ई डी एफ), विज्ञान एवं पर्यावरण स्वास्थ्य तंत्र (एस ई एच एन), सीरा क्लब (एस सी), नेशनल रिसोर्सेस डिफेंस काउंसिल (एन आर डी सी), फ्रेंड्स ऑफ़ द अर्थ (एफ ओ ई) |

जानवरों पर जानलेवा परीक्षणों कि वकालत करने वाली संस्थाओं के लिए पारिस्थितिक तंत्र, प्रजातियाँ, और मनुष्य के उत्तम हितों का संरक्षण महत्व रखता है | ऐसे परीक्षणों को मनुष्यों पर कभी भी अनुमति नहीं मिलेगी, उन पर इनके हो सकने वाले नुकसान के कारण | जबकि जो मुख्य कारण इसके मनुष्यों पर होने वाली हानि के हैं, वही कारण अमानुष जानवरों पर इसकी होने वाली हानि के भी हैं: बहुत दर्द, भावात्मक संकट, और जीवन का खात्मा | अमानुष जानवरों की उपेक्षा प्रजातिवाद, या जो किसी ख़ास प्रजाति से सम्बंधित नहीं होते उनके विरुद्ध भेदभाव है |

जानवर प्रकृति में बड़ी मात्रा में पीड़ित होते हैं | दुर्भाग्य से, रासायनिक परीक्षण का उद्देश्य अमानुष जानवरों की मदद करना नहीं बल्कि ऊपर दिए गए उद्देश्यों को आगे बढाने पर है | यदि मनुष्य जानवरों के हितों और परीक्षणों के उनके आवासों पर प्रभाव के प्रति चिंतित होते, तो हम अपने परीक्षणों द्वारा और अधिक पीड़ा और मौतों के कारक नहीं होते | इसकी बजाय, हम उन तरीकों की खोज करते जिससे हम जंगल में जानवरों का उपचार कर पाते |

यू. एस. में पर्यावरण सम्बन्धी अनुसन्धान

यू. एस. में कई संस्थान हैं जो पर्यावरण सम्बन्धी प्रयोजनों के लिए जानवरों पर परीक्षण करते हैं | नियामक संस्थाएं बड़े कार्यक्रमों के आरम्भ के लिए उत्तरदायी हैं यहाँ तक कि जबकि कानूनन उनकी ज़रूरत भी नहीं होती | जब कांग्रेस ने परीक्षणों किये जाने का अध्यादेश (कानून) लाया, तो कानून में जानवरों पर परीक्षण करना ज़रूरी नहीं था | हालाँकि, वैसे भी कई प्रयोजनों के लिए नियामक संस्थाओं के लिए जानवरों पर परीक्षण आवश्यक होता है:

1. यहाँ स्पष्ट रूप से जानवरों पर परीक्षण करने कि परंपरा है, और पहले से स्थापित संबंधों और विधियों के साथ, यहाँ परंपरा के साथ दृढ रहने के लिए एक जड़त्व है तब भी जब यहाँ इसे बदलने के लिए यहाँ कोई सक्रिय प्रतिरोध नहीं है |

2. वे जो परीक्षण करते हैं, हो सकता है जानवरों पर परीक्षण में उनके आर्थिक हित हों | इन संस्थाओं में कई कार्यपालक पशु परीक्षण उद्योग के पदों से आते हैं |

3. जानवरों पर परीक्षण कई लोगों द्वारा भरोसेमंद रूप में ग्रहण किया गया है, भले ही यहाँ परीक्षण करने के अन्य प्रभावी तरीके उपलब्ध हैं | इस वजह से, जो परीक्षण करते हैं वे महसूस कर सकते हैं कि मनुष्यों पर रसायनों के अप्रत्याशित प्रभावों को, जानवरों पर परीक्षण करना दायित्व के खतरे को कम कर देगा |

पर्यावरण सम्बन्धी परीक्षणों में जानवरों का सबसे अधिक इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं में एक यू. एस. पर्यावरणीय सुरक्षा संस्था (यू एस ई पी ए) है | यह संस्था कई परीक्षणों के काम पर है जो पर्यावरण में रसायनों की उपस्थिति के संभावित जोखिमों की जांच करती है और निर्धारित करती है कि किस स्तर पर रसायन अस्वीकार्य खतरे उत्पन्न करते हैं | इस संस्था की जमीनी स्तर पर आलोचना कि गई है कि इसके दोहरे मापदंड हैं: इसे परीक्षणों के लिए वैधता की ज़रूरत नहीं है जो जानवरों का इस्तेमाल करे, बल्कि परीक्षणों के लिए जानवरों का इस्तेमाल न किया जाना मान्य होना चाहिए |1

जबकि यूएस ईपीए इसके ज़्यादातर अनुसन्धान ओहियो और नॉर्थ कैरोलिना में अपनी खुद की प्रयोगशालाओं में करती आई है, यह अन्य निजी प्रयोगशालाओं को भी ख़ास परीक्षणों के लिये भुगतान करती है | यूनाइटेड स्टेट्स में पर्यावरणीय अनुसंधान का अन्य महत्वपूर्ण भाग यू. एस. फिश और वन्यजीव सेवा द्वारा आयोजित किया जाता है | इस संस्था का उद्देश्य यह नहीं है कि जानवरों के लाभ के लिए कुछ करना है, बल्कि मछली, वन्यजीव और “उनके आवासों को अमेरिकी जनता के लाभों को जारी रखने के लिये संरक्षित करना, बचाना और बढ़ाना है | ”2 यह संस्थान इस प्रकार जानवरों के बेहतर शोषण के तरीके जो मनुष्यों को लाभ दें, को सीखने के क्रम में जानवरों पर परीक्षण करती है | यू. एस. फिश और वन्यजीव द्वारा किये जाने वाले अनुसंधानों के लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  • कुछ क्षेत्रों में जानवरों कि कुछ आबादी को बनाये रखने के लिए पारिस्थितिक मुद्दों का अध्ययन |
  • किसी भी तरह और कैसे उस प्रजाति के जानवरों को नष्ट करना जो एक क्षेत्र के स्थानीय रूप से सम्बंधित नहीं हैं (या प्रजातियाँ जो कुछ क्षेत्रों में अनचाही हैं) |
  • उन जानवरों से कैसा व्यवहार करना जो “कीट” माने जाते हैं |3

ये सभी अनुसंधान मनुष्य के हितों कि खातिर अमानुष जानवरों को नुकसान की ओर की उदासीनता के के ढाँचे में योग करते हैं | सरकारी संस्थाएं जैसे कि यूएस ईपीए, यू एस डी ए, और भीतरी यूएस विभाग ऐसी परीक्षण विधियों में बहुत कम निवेश करती हैं जो जानवरों का इस्तेमाल ना करें | इसके अतिरिक्त, ऊपर इंगित की गई पर्यावरणवादी संस्थाएं जो जानवरों पर परीक्षण किये जाने की इच्छुक हैं वे इन तरीकों में भी नहीं निवेश नहीं करतीं, वे जो प्रजातिवादी पर्यावरणीय पद पाते हैं इस क्रम में |

अन्तःस्राविकी परीक्षण

डब्ल्यू डब्ल्यू एफ अपनी कार्यावली को आगे बढाने में सापेक्षित रूप से सफल रही है | उदाहरण के लिए, यूएस ईपीए ने रसायनों के हार्मोनल प्रभावों की जांच करने के लिए एक बड़े पैमाने पर जानवरों पर परीक्षण किये जाने की योजना विकसित करने का निर्णय लिया है | यह योजना एंडोक्राइन डीस्रुप्टर स्क्रीनिंग प्रोग्राम कहलाती है |4 होर्मोन्स पर कई रसायनों के प्रभावों के बारे में यहाँ पहले ही काफ़ी जानकारी संकलित हैं, किन्तु डब्ल्यू डब्ल्यू एफ और जानकारी चाहता है |

इन परीक्षणों का लक्ष्य जानवरों के जननक्षमता और पुनरुत्पादक अंगों पर विभिन्न पदार्थों के प्रभावों का अध्ययन करना है | परीक्षण के दौरान, जानवर ख़ास रसायन के प्रति कई बार अनावृत होते और यौन व्यवहार में असामान्यताओं पर नज़र में रखे जाते हैं, जिसमें वीर्य और अण्डों का बनना, निषेचन, अजन्में शिशु जानवरों का विकास, और होर्मोन्स की गतिविधियाँ शामिल हैं | इन अध्ययनों में जानवर अंततः मारे जाते हैं जिससे उनके पुनरुत्पादक अंगों की जांच की जा सके |

गाभिन जानवरों पर रसायनों के साथ किये गए परीक्षणों का लक्ष्य उनके शिशुओं (छोटे बच्चों) की वृद्धि और विकास पर होने वाले प्रभावों का आकलन करना है | ये परीक्षण एक गर्भवती कृन्तक का एक पदार्थ रूप में खोलकर बार-बार किया जाता है, कभी-कभी कई पीढ़ियों के लिए | इन जानवरों के बच्चे अक्सर मर जाते हैं, और जो जीवित बचते हैं वे अक्सर विकृत हो जाते हैं |

तंत्रआविषीय विकासात्मक परीक्षण करना

डब्ल्यू डब्ल्यू एफ ने कीटनाशकों और अन्य रसायन जो बहुत सारे जानवरों में हानिकारक और घातक प्रक्रियाओं में शामिल हो सकते हैं, की “विकासात्मक तंत्रआविषीय” का आकलन करने के लिए यूएस और कनाडाई सरकारों कि भी पैरवी की है | यह वर्तमान कीटनाशक परीक्षणों में परिवर्धन हो सकता है, जो साल में पहले ही हजारों जानवरों को मारता है |

उच्च उत्पादन विस्तार चुनौती कार्यक्रम

पर्यावरणवादी समूहों ने जानवरों पर परीक्षण की पैरवी में जो हासिल किया है उस सफलता का एक उदाहरण उच्च उतपादन विस्तार चुनौती कार्यक्रम (एच पी वी) है | एच पी वी चुनौती कार्यक्रम वर्ष 1998 में शुरू हुआ और यूनाइटेड स्टेट्स में उत्पादित या निर्यातित रसायनों की बड़ी मात्रा से सम्बंधित ख़तरों का अध्ययन किया गया है, दिखाते हैं कि इसमें लगभग 450,000 किलो जो कि 1 मिलियन पौंड है, की मात्रा प्रतिवर्ष निहित है (और दर्जनों कम्पनियाँ इस कार्यक्रम में भाग लेती रही हैं) |

पर्यावरण सुरक्षा कोष और रसायन निर्माता संघ दोनों ने एच पी वी चुनौती कार्यक्रम की वकालत की है, इसका दावा करते हुये कि यूनाइटेड स्टेट्स में ज्यादातर इस्तेमाल किये गये रसायनों के प्रभावों के बारे में सूचनाएँ कम हो रही थीं | कई रसायनों के लिये जानवरों पर परीक्षण शामिल रहा, यहाँ तक कि यदि रसायनों में से कुछ नियमित इस्तेमाल के कुछ वर्ष पश्चात् सुरक्षित मान लिए गए थे |5

एच पी वी चुनौती कार्यक्रम ई पी ए और इन दो संस्थाओं के मध्य बैठकों के बाद स्थापित किया गया था | कार्यक्रम वर्ष 1998 में शुरू हुआ, किन्तु यूएस पर्यावरण सुरक्षा संस्था ने कार्यक्रम की घोषणा वर्ष 2000 में की | इस तरह, इसके प्रारंभ में यह जन समीक्षा और वैज्ञानिक टिपण्णी के अधीन नहीं था | इस कार्यक्रम को जारी करते हुये. ई पी ए ने बयान दिया कि ये अमरीकी रसायन परिषद्, पर्यावरणीय समूह पर्यावरण सुरक्षा (पूर्व में पर्यावरण सुरक्षा कोष से ज्ञात), और अमरीकन पेट्रोलियम संस्था थे जो इसके उदघाटन में शामिल हुये |

यूरोपियन यूनियन में रसायन परीक्षण

यूरोपियन यूनियन में रसायनों से सम्बंधित नियम REACH (Registration, Evaluation and Authorisation of Chemicals) की निगरानी में हैं, जो यूरोपियन रसायन संस्था (ई सी एच ए) के नियंत्रण में है | REACH नियम रसायनों का पता लगाना आसान करने के लिये हैं जो ज़हरीले हैं, जिससे वे बाज़ार से हटा दिए जाएँ | REACH प्रणाली अब भी चरणबद्ध होने की प्रक्रिया में है |

REACH नियमों के अनुसार, 10 किलो प्रति वर्ष से अधिक मात्रा में उत्पादित होने वाले नए रसायनों का जानवरों पर परीक्षण होना चाहिए | इसका अर्थ है कि इस उद्देश्य के लिए बड़ी संख्या में जानवर मारे जायेंगे |6

डब्ल्यू डब्ल्यू एफ यूरोपियन यूनियन पर यह परीक्षण करने के लिए दबाव बनाती रही है, जबकि डब्ल्यू डब्ल्यू एफ के अनुसार यह “यूरोप को [रसायनों] के प्रति दृष्टिकोण की ओर एक मामूली कदम रखता है” |7

जानवरों पर रसायनों के हार्मोनल प्रभावों के यूरोपियन कमीशन के परीक्षणों के बारे में, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ ने ये कहा है “कुछ मामलों में अन्तःस्रावी भंग करने वाले पदार्थों पर कमीशन के एहतियाती कार्यवाही की ज़रूरत को मानने से सहमत होती है, किन्तु इस स्वरुप में प्रस्तावित रणनीति का पर्याप्त रूप से आगे ना जाना निराश करता है” |8

परीक्षणों के उदाहरण

अनुसन्धान उद्देश्यों के लिए जिस प्रकार जानवर पीड़ित होते और मरते हैं, विभिन्न हैं | कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं |

रसायनों के आनुवांशिक प्रभावों को निश्चित करने के लिए परीक्षण

रसायन जानवरों को बलपूर्वक खिलाये या हम्सटर, चूहों या मूसों में सीधे अन्तःक्षिप्त किये जा सकते हैं | अस्थि तत्त्व और रक्त कई बार लिए जा सकते हैं | असामान्यताओं की जांच के लिए इन नमूनों से तब कोशिकाएं ली जा सकती हैं | रसायन जो जानवरों में अन्तःक्षिप्त किये गए हैं, जानवरों के लिए बहुत पीड़ा का कारक हो सकते हैं | ये रसायन क्षोभक या बहुत ज़हरीले हो सकते हैं, और वे दर्द, दौरे और मानसिक पीड़ा के कारक हो सकते हैं |9

विकासीय विषाक्तता की क्षमता की जांच के लिये परीक्षण

नए जन्मे क्रिन्तकों के तंत्रिका तंत्र पर रसायनों के प्रभाव का आकलन करने के प्रयास के क्रम में, गर्भवती मादा चूहों को उनके गर्भकाल और पोषण के दौरान कुछ पदार्थ बलपूर्वक खिलाये जाते हैं | तब नए जन्मे चूहे परीक्षणों की एक श्रृंखला में डाले जाते हैं, जिसमें वे मारे जाते हैं | यह विकासीय तंत्रिका विषाक्तता परीक्षण, हर दौर के अध्ययन में लगभग 2500 जानवर मारता है | इस उद्देश्य के लिए ख़रगोश भी इस्तेमाल किये जाते हैं |10

पर्यावरणीय विषाक्तता के लिए परीक्षण

एक पदार्थ कि पर्यावरणीय विषाक्तता मापने के लिए, आमतौर पर मछलियाँ इस्तेमाल में लाई जाती हैं | मछलियाँ एक टैंक में रहती हैं जिसमें रसायन मिला होता है | हर दिन मौतों की संख्या का एक रिकॉर्ड बनता है | फिर, पदार्थ के सकेन्द्रण की माप के लिए एक गणना की जाती है जो आधी मछलियों को मार देता है |11

अन्य जानवर जैसे कि मूस और कुत्ते भी पर्यावरणीय विषाक्तता परीक्षण में इस्तेमाल किये जाते हैं | वे आवश्यक रूप से बार-बार लगभग तीन महीने तक रसायनों को सहते हैं, शारीरिक अंगों की कार्यप्रणाली पर रसायन के प्रभावों की जांच के लिए | इन परीक्षणों के दौरान, हो सकता है जानवर रसायन खाने के लिए बाध्य हों |

अन्य विषाक्त पदार्थों के लिए परीक्षण

विषाक्तता परीक्षण विविध प्रकार के हो सकते हैं | अतिरिक्त परीक्षण शामिल हो सकते हैं:

  • जानवर के पेट में पदार्थ को सीधे पहुंचाने के लिए ट्यूब या सीरिंज का प्रयोग |
  • जानवरों को रसायन निगलने के लिए बाध्य करने हेतु भाप (गैस) कक्ष में नियंत्रक का इस्तेमाल |
  • मछलियों और विषाक्त पदार्थों को हफ़्तों से कई महीनों के समय काल तक टैंकों में डालना |

ये परीक्षण अन्य चीज़ों, जननांगों से रक्तस्राव, ऐठन, दौरे पड़ना, पक्षाघात, दस्त, विषाक्तीकरण और मौत का कारण हो सकते हैं |

परीक्षण विधियाँ जो अमानुष जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचातीं

कई परीक्षण विधियाँ विद्यमान हैं जो जानवरों के प्रति ज्यादा अनुकूल हैं | नीचे कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

  • कोशिका समूह का इस्तेमाल कर परीक्षण करना (विट्रो परीक्षण में, जिसमें जीवित जानवरों कि बजाय कोशिका या ऊतकों का इस्तेमाल होता है) तीव्र विषाक्तता परीक्षणों का स्थान ले सकते हैं जबकि कोशिकीय स्तर पर रसायनों का प्रभाव प्रत्यक्ष है |
  • सिलिको (कंप्यूटर) परीक्षण विधियाँ मछलियों में तीव्र विषाक्तता परीक्षण करने का स्थान ले सकती हैं | प्रत्येक सिलिको परीक्षण के लिए, मछलियों की तीव्र विषाक्तता परीक्षण में 2500 की बजाय 60 मछलियाँ मरेंगी |
  • जानवरों पर बारम्बार विषाक्तता खुराक परीक्षण करने की बजाय, कोशिका समूह और गणितीय नमूनों की प्रक्रिया इस्तेमाल की जा सकती है |
  • जानवरों पर विकासीय विषाक्तता परीक्षण स्टेम कोशिका विधियों द्वारा बदले जा सकते हैं | स्टेम कोशिका परीक्षण को वैकल्पिक तरीकों को मान्यता देने वाले यूरोपियन केंद्र द्वारा भ्रूणीय माप के लिए एक उचित विधि के तौर पर पहले ही मान्यता प्राप्त है |12
  • आनुवांशिक विषाक्तता के अध्ययन के क्रम में, जीवाणु और विट्रो परीक्षण से सम्बंधित अध्ययन जीवित जानवरों पर परीक्षण के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किये जा सकते हैं |13

आगे पढ़ें

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टिप्पणियां

1 Sandler, J. (2001) “Double standards on animal testing”, New Scientist, 2277, 10 February [अभिगमन तिथि 25 फ़रवरी 2017].

2 U.S. Fish and Wildlife Service (2021) “About the U.S. Fish and Wildlife Service”, U.S. Fish and Wildlife Service, February 12 [अभिगमन तिथि 19 जुलूस 2021].

3 U.S. Department of the Interior (1984) Research and development policy / Procedures handbook, Washington, D. C.: U. S. Department of the Interior.

4 United States Environmental Protection Agency (2017) “Endocrine Disruptor Screening Program (EDSP) overview”, Endocrine Disruption, United States Environmental Protection Agency [अभिगमन तिथि 15 अप्रैल 2020].

5 Nicholson, A.; Sandler, J. & Seidle, T. (2004) “An evaluation of the US High Production Volume (HPV) chemical-testing programme: A study in (ir)relevance, redundancy and retro thinking”, Alternatives to Laboratory Animals, 32, pp. 335-342. Sandusky, C. B.; Even, M.; Stoick, K. & Sandler, J. (2006) “Strategies to reduce animal testing in US EPA’s HPV programme”, ALTEX – Alternatives to Animal Experimentation, 23, supp., pp. 150-152 [अभिगमन तिथि 7 फ़रवरी 2020]. Cardello, N. (2001) Analysis of the HPV challenge: Industry violations and EPA negligence, Washington, D. C.: Physicians Committee for Responsible Medicine.

6 Warhurst, M. (2004) The REACH files: A policy guide, Brussels: WWF [अभिगमन तिथि 2 फ़रवरी 2013]. Brown, V. J. (2003) “REACHing for chemical safety”, Environmental Health Perspectives, 111, pp. A 766-A 769 [अभिगमन तिथि 3 जनवरी 2017]. Combes, R.; Barratt, M. & Balls, M. (2002) “An overall strategy for the testing of chemicals for human hazard and risk assessment under the EU REACH system”, Alternatives to Laboratory Animals, 31, pp. 7-19.

7 World Wide Fund for Nature (2006) “REACH: Alive but not kicking”, WWF, 13 December [अभिगमन तिथि 25 फ़रवरी 2021].

8 World Wide Fund for Nature (2000) “WWF’s response to the community strategy for endocrine disruptors”, WWF, 16/03/2000 [अभिगमन तिथि 2 अप्रैल 2013].

9 Nuffield Council on Bioethics (2005) The ethics of research involving animals, London: Nuffield Council on Bioethics, sect. 4.52.

10 Ibid., sect. 9.23.

11 Johnson, W. W. & Finley, M. T. (1980) Handbook of acute toxicity of chemicals to fish and aquatic invertebrates, Washington, D. C.: United States Fish and Wildlife Service Resource Publication. Mager, E. M.; Esbaugh, A. J.; Stieglitz, J. D.; Hoenig, R.; Bodinier, C.; Incardona, J. P.; Scholz, N. L.; Benetti, D. D. & Grosell, M. (2014) “Acute embryonic or juvenile exposure to Deepwater horizon crude oil impairs the swimming performance of mahi-mahi (Coryphaena hippurus)”, Environmental Science & Technology, 48, pp. 7053-7061. King-Heiden, T. C.; Mehta, V.; Xiong, K. M.; Lanham, K. A.; Antkiewicz, D. S.; Ganser, A.; Heideman, W. & Peterson, R. E. (2012) “Reproductive and developmental toxicity of dioxin in fish”, Molecular and Cellular Endocrinology, 354, pp. 121-138 [अभिगमन तिथि 22 फ़रवरी 2017]. Dayeh, V. R.; Bols, N. C.; Tanneberger, K.; Schirmer, K. & Lee, L. E. (2013) “The use of fish‐derived cell lines for investigation of environmental contaminants: An update following OECD’s fish toxicity testing framework no. 171”, Current Protocols in Toxicology, 1.5.

12 अमानुष जानवरों का इस्तेमाल कर विकासीय तंत्र आविषीय परीक्षणों की इस आधार पर आलोचना हुई है कि जानवरों पर इसके प्रभाव उनसे काफी अलग हैं जो मनुष्यों पर इसके होने वाले प्रभाव हैं | विकासीय तंत्र आविषीय परीक्षण जानवरों के व्यवहार के साथ कई चीज़ें दर्ज़ करते हैं, जिसने इस आधार पर कई मुद्दे उठाये हैं कि परीक्षण परिणामों के व्यक्तिगत व्याख्या के लिए काफ़ी जगह हो सकती है | सवाल यह है कि या तो ये आलोचनाएँ सही हैं या ग़लत, हालाँकि इस पर शामिल दांव के मुख्य मुद्दे पर यह अलग है, जबकि यह हानिकारक प्रक्रियाओं के लिए अमानुष जानवरों पर ध्यान देने के लिए स्वीकार योग्य है, यदि उन उद्देश्यों के लिए मनुष्य इस्तेमाल ना किये जाएँ |

13 ई यू द्वारा मान्यता प्राप्त विट्रो जीन आविषालुता परीक्षण में अन्य जीवाणु उत्क्रम उत्परिवर्तन परीक्षण (अमेस परीक्षण), ई. कोली उत्परिवर्तन परीक्षा, विट्रो में स्तनधारी गुणसूत्र विपथन और विट्रो में स्तनधारी कोशिका जीन उत्परिवर्तन परीक्षण |