जंगली जानवरों में मानसिक तनाव

यह पाठ जंगल में रहने वाले जानवरों की स्थितियों की जांच करने वाली श्रृंखला का हिस्सा है । जंगल में पीड़ित और मरने वाले जानवरों के तरीकों की जांच करने वाले और पाठ के लिए, जंगल में जानवरों की स्थिति पर हमारा मुख्य पृष्ठ देखें। हम जानवरों की मदद कैसे कर सकते हैं, इस बारे में जानकारी के लिए, जंगल में जानवरों की मदद करने पर हमारा अनुभाग देखें

तनाव को आमतौर पर एक व्यक्ति द्वारा अहितकारी या डरनेवाला उत्तेजना (तनावपूर्ण) महसूस करने की शारीरिक प्रतिक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो कि आमतौर पर “अत्यधिक पर्यावरणीय या मानसिक दबाव” द्वारा उत्पन्न होता है ।1 यह एड्रेनालिन और कोर्टिसोल हार्मोन के निर्माण का कारण बनता है । जो दिल की दर और रक्तचाप में वृद्धि और अन्य नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों में प्रतिरक्षा प्रणाली का दमन करता है । यह जानलेवा अतालता या दिल के दौरे का कारण बन सकता है ।2

जबकि घरेलू जानवरों में तनाव के प्रभावों को अच्छी तरह से प्रलेखित किया गया है,3 जंगली जानवरों पर कम अध्ययन किया गया है, और वैज्ञानिक अनुसंधान में क्रूरता और तनाव की पीड़ा को कम आँका गया है, जंगली जानवरों में कैद होने के प्रभावों को छोड़कर | जंगली जानवरों को दैनिक आधार पर प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जो आमतौर पर तनावपूर्ण होते हैं: शारीरिक आघात, बीमारी, भोजन की कमी, उनकी प्रजातियों या झुंड के अन्य लोगों के साथ संघर्ष और छेड़छाड़, अन्य परिस्थितियों में ।4 यहां हम परभक्षण और सामाजिक जीवन से संबंधित तनाव को उजगार करेंगे ।

शिकारी तनाव दो प्रमुख तरीकों से उत्पन्न होता है । पहला सीधे शिकारियों की खोज से है, जिसमें जानवरों को भागने या लड़ने के तनाव का सामना करना पड़ता है । सामना इतना प्रबल हो सकता है कि तनाव में जानवर की मौत हो जाती है ।5 जंगली चूहों को बिल्ली और चूहे की लड़ाई का टेप रिकॉर्डिंग सुनने के लिए बाध्य किया गया और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई ।6 ब्लैक कैप्ड चिक्काडीस को जब एक शिकारी की आवाज़ जबर्दस्ती सुनाया गया, PTSD7 के ही तरह उनमे दीर्घकालिक तनाव की प्रतिक्रिया सामने आयी |

दूसरा, स्थलीय और जलीय जानवरों में शिकारियों के कारण अप्रत्यक्ष तनाव, निर्णय लेने में परिहार की अवस्था । अर्थात्, एक परिदृश्य जिसमें शिकार जानवर का भोजन बचाने पर मजबूर होना और शिकारी का दबाव होना या भोजन कम करना और शिकारी से ज्यादा संघर्ष करना ।8 दोनों विकल्पों में उच्च स्तर के तनाव शामिल होते हैं, लेकिन अक्सर जानवर कम खाने का विकल्प चुनकर पकड़े जाने की संभावना कम करते हैं । वे उन स्थानों पर छिप जाते हैं जहां शिकारियों की उपस्थिति कम होती है लेकिन भोजन कम होता है । उन स्थितियों में, भुखमरी और निर्जलीकरण से अतिरिक्त तनाव होने की संभावना है । इस तरह से, शिकारी न केवल एक सीधा तनाव है, बल्कि जानवरों द्वारा अपनाई गई बचने के रणनीतियों से एक अप्रत्यक्ष तनाव का कारण भी है । इससे पता चलता है कि शिकारियों का जोखिम कैसे कई जंगली जानवरों के लिए निरंतर पीड़ा का कारण है ।

जंगल में मानवीय हस्तक्षेप अक्सर जंगली जानवरों की पीड़ा को बदतर बनती है जो पारिस्थितिक उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं । इसका सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण शिकारियों के पारिस्थितिक तंत्र में पुन: आना है जहां वे लंबे समय से नहीं थे । यह आमतौर पर पारिस्थितिक तंत्र में निर्माण कार्यक्रमों के संदर्भ में नियोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य एक पारिस्थितिकी तंत्र के कुछ पहलुओं का पुनःनिर्माण करना होता है, जैसे कि एक खतरे वाली प्रजाति का संरक्षण । यह कभी-कभी उन जानवरों की पहचान करके किया जाता है, जिनकी गतिविधियाँ किसी तरह से पारिस्थितिकी तंत्र को बदल देती हैं (जैसे कि हिरण आबादी से कुछ पौधों की प्रजातियों को बचाना) और प्राचीन शिकारी (जैसे भेड़िये) का फिर आना और उन्हें कुछ खाद्य पदार्थों को खाने से रोकने के प्रयास में । अपेक्षित परिणाम हैं: (1) भेड़ियों को खाये जाने से उनकी आबादी कम हो जायेगी या (2) या एक बड़ा प्रभाव जब हिरण की आबादी भेड़ियों द्वारा शिकार होने के डर से चरना बंद कर देते हैं । खुले क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से चरने के बजाय, वे उन जगहों पर छिपते हैं जहां भेड़िये उन्हें आसानी से नहीं देख सकते हैं, और कम प्रचुरता और कम पौष्टिक पौधों को खाते हैं । इससे उत्पन्न होने वाली जैविक गतिशीलता को “भय का पारिस्थितिकी” कहा जाता है ।

इस के सबसे प्रसिद्ध मामलों में से एक संयुक्त राज्य अमेरिका में येलोस्टोन पार्क में हुआ । जैसा कि हमने ऊपर देखा है, शिकारी-प्रेरित तनाव जंगली जानवरों के लिए अत्यधिक पीड़ा का कारण हो सकता है, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप से । स्थायी रूप से “भय के परिदृश्य” में रहने के अलावा, ये जानवर भोजन की कमी से भी पीड़ित हो जाते हैं और अक्सर कुपोषण के कारण होने वाली बीमारियों और क्षति से मर जाते हैं । यह अनुमान है कि भेड़ियों के आगमन के बाद से, येलोस्टोन में हिरणों की आबादी अपने मूल आकार से घटकर आधी एक हो गई है ।9

 

नया वातावरण

जानवरों को जब एक नए क्षेत्र में रखा जाये तो वे तनावग्रस्त हो सकते हैं । मौसम की गंभीर स्थितियों, भोजन की कमी, आग और प्राकृतिक आपदाओं के कारण उन्हें स्थानांतरित करना पड़ सकता है । कई जानवरों के लिए, अपने नए वातावरण के बारे में जानने और युवा पीढ़ी को ज्ञान संचारित करने में पीढ़ियों का समय लगता है । जबकि वे समायोजन के दौरान, वे भुखमरी और अपरिचित परिवेश में रहने और भोजन खोजने की कोशिश करने के तनाव का सामना कर सकते हैं ।

 

डरावनी आवाज़

जानवर, विशेष रूप से युवा जानवर जिन्होंने अभी तक अपने पर्यावरण के बारे में नहीं सीखा है, वे अन्य जानवरों द्वारा या तूफान, हवाई जहाज या ड्रोन से उत्पन्न हुयी तेज और अपरिचित ध्वनियों से भयभीत हो सकते हैं ।10 कई जानवर भय-उत्प्रेरण ध्वनियों से प्रभावित हो जाते हैं जो कि अन्य जानवरो द्वारा उनके भोजन या साथी से दूर रखने के लिए जानबूझकर डरने के लिये किया जाता है ।

कुछ पक्षी जानबूझकर अन्य पक्षियों के चेतावनी सूचना की नकल उन्हें धोखा देने के लिए करते हैं । अफ्रीकी कांटा-पूंछ वाले ड्रोंगोस न केवल अन्य पक्षियों के, बल्कि कुछ स्तनधारियों जैसे कि मीरकैट के चेतावनी सूचना का नकल कर सकते हैं । चेतावनी से, जानवरों ने अपनी भोजन आपूर्ति छोड़ कर उड़ गये, और ड्रोंगोस ने परित्यक्त भोजन पर झपट्टा मार दिया । इससे झूठे अलार्म के शिकारो में न केवल एक गैर-मौजूद खतरे का जवाब देने बल्कि खोए हुए भोजन का तनाव पैदा होता है | फिर उन्हें नया भोजन खोजने के लिए बाध्य होना पड़ता है, जो स्वयं एक जोखिम भरा और तनावपूर्ण घटना हो सकती है । इस धोखे के शिकार बार-बार झूठे अलार्म के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को कम करते हैं, लेकिन ड्रोंगोस चेतावनी सूचना को बदलकर भय की प्रतिक्रिया को जारी रखने में सक्षम रहता है । कुछ पंक्षी ड्रोनोस की चाल को समझने के बाद भी ड्रोनस के अनुसार चलते है | वे अतिरिक्त तनाव को सहन करते हैं क्योंकि ड्रोंगोस की वास्तविक चेतावनी सूचना कुछ सुरक्षा प्रदान करती हैं ।11

स्तनधारी भी इस तरह के धोखे का इस्तेमाल करते हैं । उदाहरण के लिए, निचले दर्जे वाले कैपुचिन बंदर झूठी चेतावनी कॉल करते हैं जब उच्चे दर्जे वाले बंदर भोजन कर रहे होते हैं, संभवत: बिना परेशान या हमला हुए खाने का मौका पाने के लिए । वे इस तरह के झूठी सुचना कभी कभी देते हैं जब कोई अच्छा भोजन जैसे केले जो अधिक प्रभावी बंदरों द्वारा अकेले खाया जा रहा हो ।12

संभोग के बाद नर का मादाओं की रक्षा करना आम बात है । यह झींगुर, नीलकंठ, या लंगूर सब में देखा जाता है । कुछ जानवर, जैसे कि गिलहरी और निगल, संभोग के बाद झूठी चेतावनी कॉल का उपयोग करते हैं, ताकि संभावित प्रतियोगियों को दूर भगाया जा सके या अपने सहयोगियों को उन्हें छोड़ने से रोका जा सके ।13

 

सामाजिक जानवरों के तनाव

सामाजिक समूहों में रहने से जानवरों को कीमत चुकानी पड़ती है, मुख्य रूप से सामाजिक संघर्ष और प्रतिस्पर्धा के कारण । जानवरों की कई प्रजातियां जो सामाजिक और असामाजिक (जैसे क्रिकेटर और लॉबस्टर) हैं और उनमे क्रमबद्ध पदवी है |14 हालांकि पदवी के लिए बहुत सारी लड़ाई होती है, कुछ में वास्तविक हिंसा या निरंतर उत्पीड़न शामिल है । सामाजिक स्थिति, जो प्रत्येक जानवर के पदानुक्रम उसके स्तर को प्रभावित करती है, खासकर जब तनाव-संबंधी बीमारियों की बात आती है ।15 यह अच्छी तरह से प्रलेखित किया गया है कि सामाजिक अधीनता, उदाहरण के लिए, विभिन्न प्रजातियों जैसे प्राइमेट्स,16 कृन्तकों17 और मछलियों18 में एक तनाव का गठन करती है । . इन सामाजिक प्रजातियों के निम्न श्रेणी के जानवरों में, अवसादग्रस्तता प्रतिक्रियाएं और प्रजनन अवसरों में कमी अक्सर देखी जाती हैं ।19

कुछ मामलों में, जानवरों को उनके समूहों20 से निकाल21 दिया जाता है । एक जानवर को असामाजिक व्यवहार के कारण, प्रमुख नर या मादा के द्वारा डराकर , या बीमारी या धोखाधड़ी के कारण समूह के लिए हानिकारक या बेकार मान कर निकाल दिया जाता है । जब भोजन या अन्य संसाधन दुर्लभ होते हैं, तो अधिक आक्रामक जानवर कुछ जानवरों को छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं । एक समूह से बाहर निकाले गए जानवर शिकारी और भुखमरी के अधिक जोखिम में होंगे और सामाजिक संपर्क में कमी से अतिरिक्त तनाव झेल सकते हैं ।

अन्य अधीनस्थ जानवरों को अपने समूह में बने रहने के लिए लगातार खतरों और धमकी का सामना करना पड़ सकता है । धमकी के सामान्य कारण भोजन और संभोग है । प्रमुख नर सम्भोग के लिए दूसरे पुरुषों को धमकाता या हमला करता है और उन बच्चों को मारता है जिनके पिता वो नहीं हैं, जिससे माताओं को दुःख होता है, जो तब उसके साथ संभोग करने के लिए मजबूर हो जाती है । आप अंतःजातिये संघर्ष और यौन संघर्ष के बारे में हमारे पृष्ठों में इस बारे में अधिक सीख सकते हैं ।

मादाओं के समूह में अधीनस्थ मादा लगातार खतरा और अभाव का सामना कर सकती हैं, जहाँ प्रमुख मादा आक्रामकता और धमकी से उसके भोजन और सम्भोग के अवसरों को सीमित करती है ।22 अधीनस्थ महिलाओं के बच्चों को प्रमुख मादा द्वारा मारा जा सकता है । वह अधीनस्थों को अपनी सेवा करने के लिए मजबूर कर सकती है, विशेष रूप से उसकी प्रजनन सफलता बढ़ाने के लिए । यह मिरकैट्स में आम है । जिन माताओं की बच्चों की मार दिया गया , वो युवा प्रमुख मादा की देखभाल करती है अन्यथा उसे कॉलोनी से बाहर निकाल दिया जाता है और वो अपने दम पर जीवित रहने के लिए खतरों का सामना करती है |23

कई सामाजिक प्रजातियों में माँ को बच्चो से अलगाव के कारण तनाव का, अध्ययन किया गया है । मातृ अलगाव का माँ और बच्चे दोनों के शारीरिक और व्यवहार पर एक लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव हो सकता है । अलग होने के बाद, माँ आमतौर पर अपनी गतिविधि काम कर देती है, शरीर मोड़ के चलती है, और तनाव से प्रेरित अन्य बीमारी को प्रदर्शित करती है ।24 बच्चे जो अपनी माताओं से अलग हो जाते हैं, उनमें बीमारी का खतरा बढ़ जाता है और उनके जीवन में तनाव की प्रतिक्रिया बढ़ जाती है । जंगली जानवरों में, यह सिटासिन, हाथियों, कृन्तकों और प्राइमेट्स25 में देखा गया है, हालांकि अन्य सामाजिक प्रजातियों को भी समान प्रभाव का अनुभव होने की संभावना है । वे जानवर जो युवा होने पर माता-पिता की देखभाल में रहे , लेकिन वयस्क होने पर एकांत जीवन जीते हैं वो भी मातृ अलगाव से प्रभावित हो सकते हैं ।26


अपने बच्चे की मौत पर पेंग्विन माता-पिता की प्रतिकिया

मातृ अलगाव के प्रभावों के अलावा, परिवार के सदस्यों या दोस्तों के नुकसान पर दु: खद व्यवहार का प्रदर्शन करते हुए हाथी, केटासियन , कुत्ते, पक्षी और अन्य जानवरों27 के कई दस्तावेज हैं ।


हाथियों की कुलमाता की मौत पर हाथियों की प्रतिक्रिया


हाथी के बच्चे का अंतिम संस्कार


परिवार और दोस्तों को खोने पर जानवरो शोक

स्तनधारियों, पक्षियों, और आर्थ्रोपोड्स में, जानवरों की PTSD जैसे लक्षण दिखाई देते हैं जो तनावपूर्ण घटनाओं में बुरा मिज़ाज, चिंता में विकार और सामाजिक समूहों नकारात्मक भाव फैलाना है |28 कुछ प्रजातियों, जैसे खरगोश और गिलहरी, स्थायी तनाव में जीते हुए पर्यावरणीय खतरों में एक अनुकूल प्रतिक्रिया देते है ।29

कभी-कभी यह अनुकूल होता है और पशु में मनसिक सुधार और जीवित रहने की क्षमता में सुधार करता है । अन्य मामलों में, यह जानवरों की कार्य करने की क्षमता और उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए कई खतरों के जोखिम को बढ़ा सकता है । यद्यपि यह दुख के अन्य स्रोतों की तुलना में कम व्यापक है, लेकिन जो इससे पीड़ित हैं, यह उनको कमजोर करने वाला और जान को खतरा हो सकता है ।


आगे की पढाई

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नोट्स

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अकशेरुकी पर तनाव के प्रभाव पर अध्ययन के उदाहरण हैं, छेड़छाड़ के दौरान चिंता, मकड़ियों में तनाव और आक्रामकता के कारण सामाजिक अलगाव, और तनाव में मधुमक्खियों में निराशावाद: Bacqué-Cazenave, J.; Berthomieu, M.; Cattaert, D.; Fossat, P.; Delbecque, J. P. (2019) “Do arthropods feel anxious during molts?”, Journal of Experimental Biology, 222 [अभिगमन तिथि 24 सितंबर 2019]; Chiara, V.; Portugal, F. R. & Jeanson, R. (2019) “Social intolerance is a consequence, not a cause, of dispersal in spiders”, PLOS Biology, 17 (7) [अभिगमन तिथि 22 November 2019]; Mendl, M.; Paul, E. S. & Chittka, L. (2011) “Animal behaviour: Emotion in invertebrates?”, Current Biology, 21, pp. R463-R465 [अभिगमन तिथि 24 सितंबर 2019].

4 Bacqué-Cazenave, J.; Berthomieu, B.; Cattaert , D.; Fossat , P. & Delbecque, J. P. (2019) “Do arthropods feel anxious during molts?”, op. cit.

5 McCauley, S.; Rowe, J. L. & Fortin, M.-J. (2011) “The deadly effects of ‘nonlethal’ predators”, Ecology, 92, pp. 2043-2048.

6 Gregory, N. G. (2004) Physiology and behaviour of animal suffering, Oxford: Blackwell Science, p. 18.

7 Zanette, L. Y; Hobbs, E. C.; Witterick, L. E.; MacDougall-Shackleton, S. A. & Clinchy, M. (2019) “Predator-induced fear causes PTSD-like changes in the brains and behaviour of wild animals”, Scientific Reports, 9 [अभिगमन तिथि 24 सितंबर 2019].

8 Cherry, M. J.; Warren, R. J. & Conner, L. M. (2019) “Fire‐mediated foraging tradeoffs in white‐tailed deer”, Ecosphere, 8 (4) [अभिगमन तिथि 9 सितंबर 2019]. Clinchy, M.; Zanette, L.; Boonstra, R.; Wingfield, J. C. & Smith, J. N. (2004) “Balancing food and predator pressure induces chronic stress in songbirds”, Proceedings of the Royal Society B: Biological Sciences, 271, pp. 2473-2479 [अभिगमन तिथि 5 जनवरी 2013]. Preisser, E. L.; Bolnick, D. I. & Benard, M. F. (2005) “Scared to death? The effects of intimidation and consumption in predator–prey interactions”, Ecological Society of America, 86, pp. 501-509.

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10 Wegdell, F.; Hammerschmidt, K. & Fischer, J. (2019) “Conserved alarm calls but rapid auditory learning in monkey responses to novel flying objects”, Nature Ecology & Evolution, 3, pp. 1039-1042.

11 Flower, T. P.; Gribble, M. & Ridley, A. R. (2014) “Deception by flexible alarm mimicry in an African Bird”, Science, 344, pp. 513-516.

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14 झींगुरों में प्रभुत्व पदानुक्रम पर देखे: Rudin, F. S.; Tomkins, J. L. & Simmons, L. W. (2017) “Changes in dominance status erode personality and behavioral syndromes”, Behavioral Ecology, 28, pp. 270-279 [अभिगमन तिथि 26 सितंबर 2019].

कुछ उप सामाजिक और अकेले रहने वाले जीव जैसे लॉबस्टर और ऑक्टोपस में भी प्रभुत्व पदानुक्रम है | मुख्य रूप से आश्रय, क्षेत्र और भोजन के लिए | Cigliano, J. (1993) “Dominance hierarchies in octopuses: Serotonin”, Animal Behaviour, 46, pp. 677-684 [अभिगमन तिथि 26 सितंबर 2019]; Cigliano, J. (1991) “Dominance and den use in Octopus bimaculoides”, Animal Behaviour, 46, pp. 677-684 [अभिगमन तिथि 16 दिसंबर 2019]; Sato, D. & Nagayama, T. (2012) “Development of agonistic encounters in dominance hierarchy formation in juvenile crayfish”, Journal of Experimental Biology, 215, pp. 1210-1217 [अभिगमन तिथि 20 दिसंबर 2019]; Huber, R.; Smith, K.; Delago, A.; Isaksson, K. & Kravitz, E. A. (1997) “Serotonin and aggressive motivation in crustaceans: Altering the decision to retreat”, Proceedings of the National Academy of Science of the United States of America, 94, pp. 5939-5942 [अभिगमन तिथि 25 सितंबर 2019]; Sbragaglia, V.; Leiva, D.; Arias, A.; García, J. A.; Aguzzi, J. & Breithaupt, T. (2017) “Fighting over burrows: The emergence of dominance hierarchies in the Norway lobster (Nephrops norvegicus)”, Journal of Experimental Biology, 220, pp. 4624-4633 [अभिगमन तिथि 26 सितंबर 2019].

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