जंगली जानवरों के कष्टों का परिचय

एक पल के लिए आप एक जंगली जानवर के बारे में सोचो । किस जानवर की तस्वीर आपके मन में आती हैं?

जब यह पूछा जाता है , ज्यादातर लोगों को स्वस्थ, वयस्क, बड़े विदेशी स्तनधारियों (या शायद एक बड़े वर्टेब्रेट ), जैसे एक शेर या एक हाथी के बारे में सोचते है । वे खुश जानवरों के बारे में सोचते हैं, जो बिना किसी मानवीय नुक्सान के खुद में आनंद ले रहे हैं । जंगल में जानवरों की स्थिति का ये नज़रिया ही प्रचलित है ।

इसके बावजूद, दुनिया भर में कई लोग हैं जो जंगली जानवरों को विभिन्न तरीकों से बचाते है और सहायता करते हैं, जैसा कि हम बाद में देखेंगे । अन्यथा ये जनवर दर्दनाक तरीके से मर जाएंगे । वहां बाहर जानवरों के लिए जीवन आसान नहीं है । जिस क्षण से वे पैदा होते हैं या अपने अंडों से निकलते हैं, उन्हें बहुत गंभीर खतरों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उन्हें बहुत नुकसान होता है ।

जिन कारकों से जानवर पीड़ित होते हैं, वे बहुत विविध होते हैं । कुछ प्रत्यक्ष मानवीय कार्रवाई के कारण हैं । दूसरों को अप्रत्यक्ष मानव कार्रवाई, प्राकृतिक परिस्थितियों, या दोनों के संयोजन के परिणाम से हो सकता है । आंशिक रूप से या पूरी तरह से प्राकृतिक होने वाले कारकों में शत्रुतापूर्ण मौसम की स्थिति, भूख और कुपोषण, प्यास, बीमारियों की विस्तृत श्रृंखला, दुर्घटनाएं और चोटें, अन्य जानवरों के साथ संघर्ष, परजीवीता और मनोवैज्ञानिक तनाव हैं । ये असामान्य परिस्थितियां नहीं हैं, और उनके कारण जानवरों को जो नुकसान पहुंचाता है, वो तुच्छ नहीं हैं । वे उनके लिए उतने ही दर्दनाक और गंभीर हैं जितने कि वे पालतू जानवरों या हमारे लिए होंगे । वास्तव में, उनके कारण, कई जानवरों के जीवन मे खुशी से कहीं अधिक दुख होते हैं ।

उदाहरण के लिए, हम सोच सकते हैं कि एक पक्षी का बच्चा जो उसके घोंसले से गिरता है और पीड़ित होता है, कई दिनों तक जमीन पर भूख से मरता है, ठंड से पीड़ित होता है, संकट होता है, और गिरने के कारण उसे मिली चोटों का दर्द होता है । या एक मछली का बच्चा जो भोजन ढूंढने में सक्षम नहीं है । युवा जानवरों के बीच ऐसे मामले आम हैं । कुछ जानवर लंबे समय तक जीवित रहते है और वयस्कता तक पहुंचने में सक्षम हो सकते हैं लेकिन पुराने दर्दो से गुजरते हैं, या बहुत सारे दुख को सहने के बाद मर जाते हैं । इसका एक उदाहरण नेसल बोट परजीवी संक्रमण से पीड़ित हिरण है । ये लार्वा हैं जो उनके नाक में तब तक बढ़ते हैं जब तक कि वे इतने असंख्य और इतने बड़े नहीं हो जाते कि हिरण अब सांस लेने में असक्षम हो जाता है और धीरे-धीरे दम घुटने से मर जाता है ।

ऐसे उदाहरणो से पता चलता है कि यह विचार कि जंगली जानवरों का भला उनको जंगल में अकेला छोड़ देने से होता है हमेशा सही नहीं है । ऐसे कई मामले हैं जहां हम जानवरों की मदद करने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं, या जहां उनकी मदद करने के कारण हो सकता है की दूसरों को ज्यादा नुकसान हो । लेकिन ऐसे अन्य मामले भी हैं जहां हम जानवरों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर कर सकते हैं जो कुल मिलाकर सकारात्मक हो सकते हैं ।

कुछ लोग हैं, जो हमारे जैसे, जानवरों की परवाह करते है, आश्चर्य हो सकता है क्यों , यह साफ़ देखते हुए भी कि कितने सारे जानवर मनुष्यों द्वारा नुकसान पहुँचाए जा रहे हैं, जैसे कैद में रखना या जंगल में जानवरों को नुक्सान पहुँचाना जैसे की मछली पकड़ना, एक मुद्दा होना चाहिए । अन्य कारणों से पीड़ित जानवरों के बारे में चिंता सिर्फ इस चिंता का विस्तार है । सभी जानवरों की देखभाल करने में कोई विरोधाभास नहीं है, भले ही उन्हें मनुष्यों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया हो या अन्य कारणों से, जैसे हानिकारक मौसम की स्थिति या बीमारी । केवल इस बात में विरोधाभास होगा जब केवल मनुष्यों द्वारा पीड़ित जानवरों की सहायता करी जाए और अन्य जानवरों की परवाह ना करें ।

 

क्यों जंगली जानवरों की पीड़ा बहुत महत्वपूर्ण है

जंगली जानवरों के दुख के महत्व का बेहतर एहसास कराने के लिए हमें इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि कई जानवरों का जीवन दुख भरा होता है, जैसा कि ऊपर वर्णित है । इस तरह के मामले उससे बहुत अधिक है जितना हमने शुरू में विश्वास किया था । हम यह जांच करके देख सकते हैं कि पशु आबादी कैसे विकसित होती है, और उनके युवाओं में उनकी मृत्यु दर क्या है । यह जीव विज्ञान में विभिन्न क्षेत्रों द्वारा , जानवरों की जनसंख्या गतिशीलता और जीवन इतिहास की जांच द्वारा अध्ययन किया जाता है ।

इसका निर्धारण करने वाला एक प्रमुख कारक प्रजनन रणनीति है जिसका विभिन्न जानवर पालन करते हैं । प्रकृति में, कुछ जानवर हैं जो एक समय में सिर्फ एक संतान को जन्म देते है । ये जानवर आम तौर पर अपनी संतानों की बहुत ज़्यादा देखभाल करते है ,उनकी जीवित रहने की संभावनाओं को अधिकतम करने के लिए । हालांकि, अधिकांश जानवर एक बहुत ही अलग प्रजनन रणनीति का पालन करते हैं, जो बहुत बड़ी संख्या में संतान को जन्म देते हैं । उनके जीवन की शुरुआत में इन जानवरों के जीवित रहने की दर आम तौर पर बहुत कम होता है । यदि कोई जानवर अपने जीवन के दौरान सिर्फ एक बार प्रजनन करते हैं और उनकी आबादी स्थिर रहती है, तो औसतन प्रति जोड़ा उनकी संतानों में से केवल दो ही वयस्कता तक पहुंचते है (यानी, प्रति माता-पिता एक) । यदि वे कई बार पुन: पेश करते हैं, तो औसत संख्या कम हो जाती है ।

इन जानवरों में से कुछ जानवर कुछ समय के लिए जीवित रह सकते हैं, भले ही वे परिपक्वता तक नहीं पहुंच पाते हैं । लेकिन कई मामलों में, वो जीवन के शुरू में ही मर जाते हैं । उनमें से कुछ संवेदनशील प्राणियों में विकसित कभी नहीं हो पाते है । लेकिन उनमें से कई संवेदनशील हो जाते हैं, और वे आम तौर पर उन तरीको से मर जाते हैं जो दर्दनाक होती है ,कई बार बेहद दर्दनाक । वे भूख जैसे दर्दनाक तरीकों से मारे जाते हैं, या ठंड या बीमारी जैसे अन्य कारकों के कारण मर जाते हैं । हालांकि, क्योंकि वे मरते समय बहुत छोटे होते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी सुख का आनंद लेने का अवसर नहीं मिलता हैं । वे अपनी मौत के दर्द से थोड़ा अधिक अनुभव करते हैं । इस कारण उनके जीवन में आनंद से ज़्यादा दुख होता है । दुर्भाग्य से, ये जानवर अस्तित्व में आने वाले जानवरों के बहुमत हैं । यह संकेत करता है कि जंगली जानवरों के दुख का बहुत महत्व क्यों है । यह भी पता चलता है क्यों जानवरों की मदद और मदद के तरीको से हम एक बड़ा फर्क ला सकते है । निम्नलिखित इसके कुछ उदाहरण हैं ।

 

जंगली जानवरो के दुखो के कारण और जानवरों की सहायता के तरीके

जंगल में जानवर पीड़ा झेलते है और विभिन्न कारकों के कारण जैसे की शत्रुतापूर्ण मौसम की स्थिति, प्राकृतिक आपदाओं, कई विभिन्न प्रकार के रोगों, परजीवीता, भूख, कुपोषण और प्यास, मनोवैज्ञानिक तनाव, जानवरों के बीच संघर्ष, और दुर्घटनाए जो गंभीर चोटों का कारण बन सकता है, समय से पहले मर जाते हैं । लेकिन कई मामलों में उनकी मदद की जाती है । इसके कई उदाहरण हैं । जैसे समुद्र तटों पर फंसे जानवरों का बचाव, बर्फ, मिट्टी तालाबों और कई अंय स्थितियों में फंसे जानवरो का बचाव , आश्रय प्रदान करना और बीमार और घायल जानवरों को सहायता प्रदान करना , और अनाथ जानवरों की देखभाल, और विशेष रूप से कठोर स्थितियों में भूख से मरने से उनको बचाना । एक बड़े पैमाने पर, टीकाकरण कार्यक्रम पीड़ा और बीमारी के कारण मरने से जानवरों की भारी संख्या को बचाता है । जानवरों की मदद के लिए नए कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं । उदाहरण के लिए, अच्छी तरह से निगरानी वाले पायलट कार्यक्रम उपनगरीय, शहरी या औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले जंगली जानवरों की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू किये जा सकते हैं । जो हमने उन से सीखा है, वो कृषि क्षेत्रों में रहने वाले जानवरों के लिए लागू किया जा सकता है, और फिर ज़रूरतमंद अर्द्ध जंगली और जंगली जानवरों की मदद करने के लिए । इसके अलावा, हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि भविष्य में हम चीजों को उन तरीकों से बेहतर बनाने में सक्षम हो सकते हैं जो हम अभी नहीं कर सकते । लेकिन यह संभव होने के लिए , यह जरूरी होगा कि हमारे मन में जानवरों के लिए चिंता और परवाह हो ,न की उपेक्षा ।

 

क्यों लोग जानवरों की मदद करने का समर्थन करने से इनकार करते हैं?

कुछ लोग परवाह नहीं करते की जानवरों के साथ क्या क्या होता है, जब कि वे भी महसूस कर सकते है और पीड़ित हो सकते है । यह एक तरह का प्रजातियों में भेदभाव है जिसे प्रजातियांवाद कहते है । हालांकि, कई लोग अन्य जानवरों की देखभाल करते हैं, लेकिन अक्सर जंगली जानवरों के साथ क्या होता है, इस बात से अनजान होते हैं । हमने बस कुछ ही तरह की मदद के उदाहरण देखा है जिनकी उन्हें ज़रूरत होती है । ज्यादातर लोगो ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि जंगली जानवरों को हमारी मदद की इतनी जरूरत है । ऐसे कारण हैं जो इस बात की व्याख्या करते हैं:

सबसे पहले, ज्यादातर लोग इस बात से अपरिचित है की इन जानवरों का जीवन कैसा होता हैं । विशेष रूप से, उन्हें पशु जनसंख्या गतिशीलता के बारे में पता ही नहीं है । इसके अलावा, जो लोग जानते भी हैं वे कभी-कभी जानवरों के अपने दुख के दृष्टिकोण पर चिंतन करने में विफल रहते हैं ।

दूसरा, हम संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह है जो विकृत करता है की कैसे हम प्रकृति में पशु जीवन की कल्पना करते है । जब ज्यादातर लोग जंगली जानवरों के बारे में सोचते हैं, तो उनके दिमाग में जो छवि आती है, वह बड़े जानवरों, अधिकतर स्तनधारि , या शायद बड़े पक्षियों की होती है; किसी भी मामले में लगभग निश्चित रूप से वर्टेब्रेट । वे शेर और बाघों के बारे में सोच सकते हैं, शायद जिराफ, हाथियों, भेड़ियों, बाज या चील के.. । इसके अलावा, लगभग सभी मामलों में, वे वयस्क जानवरों के बारे में सोचते हैं । वे शायद ही कभी मछली बच्चे या इन्वर्टेब्रेट के बारे में सोचते है जो अपने अंडे से निकला होता है । हालांकि, ये प्रकृति में भारी बहुमत में है । अधिकांश जानवर छोटे और बहुत छोटे होते हैं । कई लोगों के मन मे जंगली जानवरों की जो तस्वीर है, वह लोगो केविचारों को बहुत प्रभावित करता है की पशु का जीवन प्रकृति में कैसा हैं, जो पूरी तरह से प्रतिनिधि नहीं है ।

अंत में, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हे लगता है कि हमे जंगली जानवरों की मदद नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करना “प्राकृतिक नहीं है.” हालांकि, हमें ध्यान देना चाहिए कि जब मनुष्य पीड़ित हो सकते हैं, तो जंगली जानवर भी और हम आम तौर पर उनकी मदद करने का समर्थन करते हैं । जानवरों के मामले में अलग रवैया क्यों है? यह जंगल में रहने वाले जानवरों के खिलाफ भेदभाव का एक रूप है । जानवर सिर्फ उन स्थितियों के कारण होने वाली पीड़ा से मुक्त होना चाहते हैं, इसलिए हमें उनकी मदद करनी चाहिए चाहे मनुष्य उन हानिकारक स्थितियों के लिए जिम्मेदार हो या नहीं ।

वास्तव में, हमें यह भी ध्यान मे रखना चाहिए कि मनुष्य पहले से ही अक्सर मानव हितों को आगे बढ़ाने के लिए प्रकृति में हस्तक्षेप करता हैं । हम घरों , अस्पतालों , स्कूलों , पुस्तकालयों एवं आदि का निर्माण करते है … हमें खाने के लिए जरूरी खाना भी उगाते हैं । यदि हम अपनी आवश्यकताओं की खातिर अपने परिवेश को बदलने के लिए तैयार हैं, तो जब जंगली जानवरों जैसे अन्य समान रूप से संवेदनशील प्राणियों को मदद की आवश्यकता हो, हमें मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए ।

 

जानवरों की सबसे अच्छी मदद कैसे करें, इसके बारे में अधिक सीखना

क्योंकि, सबसे अच्छा जानवरों की मदद करने के बारे में जानने के लिए सावधान अध्ययन की आवश्यकता है, तो अनुसंधान में निवेश करना महत्वपूर्ण है ताकि हमें दोनों, जानवरों के लिए परिणामों का अनुकूलन और उनकी मदद करने के नकारात्मक अप्रत्यक्ष परिणामों से बच सके । अच्छी खबर यह है कि पहले से ही हमारे पास बहुत सारी जानकारी है जिनका उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है । पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों ने पालतू जानवरों की भलाई का आकलन करने पर ध्यान केंद्रित किया है, और उन्होंने जंगली जानवरों की भी जांच की है । परिस्थितिविज्ञानशास्रीयों ने इन जानवरों की जनसंख्या गतिशीलता, उनके जीवन के इतिहास और अन्य जानवरों और उनके परिवेश के साथ संपर्क करने के तरीके पर शोध किया है । यह सब संभवतः हमें आधार प्रदान कर सकता है जिसके आधार पर जानवरों की मदद करने के लिए कार्यक्रमों को आयोजित किया जा सकता है ।

दुर्भाग्य से, इन विभिन्न क्षेत्रों से ज्ञान शायद ही कभी एकीकृत है । हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि व्यक्तिगत रूप से अमानवीय पशुओं की चिंता, को अभी तक वैज्ञानिक अनुसंधान परियोजनाओं के सिरों में शामिल नहीं किया गया है । यही कारण है कि यह तर्क दिया गया है कि अनुसंधान का एक नया बहु-विषयक क्षेत्र बनाया जाना चाहिए । इस नए क्षेत्र से हमें और अधिक ज्ञान मिलेगा जिसे जंगली जानवरों की मदद करने में इस्तेमाल किया जा सकता है ।

वर्तमान में, इस मुद्दे पर अनुसंधान से हमें जानवरों की मदद करने के लिए नए तरीके विकसित कर सकते है, और मौजूदा तरीकों की जांच कर सकते हैं । वर्तमान तरीकों में से कुछ दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकते है, जो कहना है कि इन तरीकों में से कुछ हमें दूसरों की तुलना में अधिक जानवरों की मदद करने की अनुमति देते है । अधिक शोध हमें अधिक प्रभावी तरीकों को चुनने और बेहतर बनाने में मदद कर सकते है, साथ ही दूसरों को यह समझने में मदद कर सकता है कि यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है ।

अधिक ज्ञान जुटाने से हमें जानवरों की मदद करने के नए तरीके विकसित करने में सहायता मिलेगी जो भविष्य में हमारे सकारात्मक प्रभाव में वृद्धि कराएगा । इसके अलावा, हम अधिक जान सकते है की कैसे जानवरों की भलाई विभिंन स्थितियों में पारिस्थितिकी तंत्र के स्तर पर, प्रभावित करता है, और सबसे अच्छे तरीको से बुरे से बेहतर स्थितियों के संक्रमण को प्राप्त करने में सक्षम हो जाएगा ।

इस के कारण, जंगली जानवरों की देखभाल करने का एक दृष्टिकोण संभवतः न केवल वर्तमान में रहने वाले जानवरों पर बल्कि भविष्य के जानवरों पर भी एक बड़ा प्रभाव डाल सकता है । यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर हम वास्तव में इस बात की परवाह करते हैं कि जानवरों के साथ क्या होता है, तो हमें केवल आज रहने वालों के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए । भविष्य में रहने वाले जानवरों का भी उतना ही पीड़ित होने की क्षमता है, इसलिए हमारी प्राथमिकता भविष्य में इनकी भलाई संभव करना होना चाहिए ।


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